29. 31.5.1936 मुक्ति का मार्ग क्या है? - Page 132

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दौरान वर का घोड़ी की पीठ पर बैठ जुलूस के अधिकार का दावा आम साधारण घटनाएं हैं। आप सभी इन तथ्यों के बारे में जानते हैं क्योंकि यह सब आपकी आंखों के सामने नित्य घटित होते हैं। लेकिन दूसरे बहुत से कारण है, जिनके लिए हिन्दू जाति के सवर्णों द्वारा अछूतों पर अत्याचार किए जाते हैं अगर यह भेद खोल दिए जाएं तो हिन्दुस्तान से बाहर के लोगो को चौका देंगे। अछूत अगर अच्छा कपड़ा पहने तो वे पीटे जाते हैं। उनके लोहे तथा तांबे के बर्तन इस्तेमाल करने पर उनको कोड़े लगाए जाते हैं। उनके घर जला दिए जाते हैं, क्योंकि उन्होंने भूमि की जुताई की। पवित्र धागा अपने शरीर पर पहनने के लिए वे पीटे जाते हैं। मरे हुए पशुओं को उठाने से मना करने पर तथा सड़ा मांस न खाने पर या जुराब व जूते पहन कर गांव की सड़क पर चलने या सवर्ण हिन्दुओं के आगे झुक कर अभिवादन न करने पर या खुले खेतों में पाखाना के लिए जाते समय तांबे के लोटे में परिक्षालन के लिए पानी लेकर जाने पर भी उनकी पिटाई होती है। हाल ही में एक घटना सामने आई जिसमें अछूतों की पिटाई इसलिए की, क्योंकि उन्होंने एक रात्रि भोजन में चपातियां (रोटियां) परोसी। आपने ऐसी घटनाएं अवश्य सुनी होंगी और आप में से कई ने ऐसी यातनाएं अनुभव भी की होंगी। जहाँ पिटाई करना सम्भव नहीं होता, वहां समाज से बहिष्कार का अस्त्र आपके विरुद्ध उपयोग होने का ज्ञान भी आपको होगा। आप सबको ज्ञात है कि कैसे सवर्ण (छूत) हिन्दू आपको काम पर न रखने की पाबन्दी, पशुओं को जंगल में चराने पर रोक और आपके आदमियों पर गांव में घुसने पर रोक इत्यादि लगाकर आपके दैनिक जीवन में कठिनाइयां पैदा कर जीना दूभर कर देते हैं। परन्तु आप में से किसी विरले ने ही यह समझने की कोशिश की होगी कि ऐसा क्यों होता है। उनकी इस तानाशाही का आधार क्या है? मेरे लिए यह अतिआवश्यक है कि हम सब यह समझें।

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यह एक वर्ग संघर्ष का मामला है

उपरोक्त उदाहरणों का किसी के व्यक्तिगत सद्गुणों या बुरी आदतों के साथ कोई संबंध नहीं है। यह किन्हीं दो प्रतिद्वंदियों के बीच की पुश्तैनी दुश्मनी नहीं हैं। छुआछूत की समस्या भी वर्ग संघर्ष का मामला है। यह हिन्दू जाति के छूतों और अछूतों के बीच का संघर्ष है। यह एक आदमी के प्रति अन्याय करने का मसला नहीं है। यह एक वर्ग पर दूसरे के द्वारा अन्याय करने का मसला है। इस वर्ग संघर्ष का सम्बन्ध सामाजिक, स्तर का वर्ग है। यह संघर्ष दर्शाता है कि एक वर्ग के दूसरे वर्ग के साथ सम्बन्ध कैसे रखने चाहिए। आप जैसे ही दूसरों के साथ बराबरी का व्यवहार करने का दावा करते हैं तुरन्त ही यह संघर्ष शुरू हो जाता है। अगर पहले से ऐसा नहीं होता तो रोटी परोसना, अच्छी किस्म के कपड़े पहनना, पवित्र धागा