113
आज्ञा भी नहीं देती हैं। वे भली भांति जुड़े भी नहीं है बल्कि गांवों में बिखरे हुए हैं। इन्हीं कारणों से ये अल्प जनसंख्यक अछूत संघर्ष में नम्बर जुटा पाने में असमर्थ हैं इसलिए और कमजोर पड़ते हैं। वित्तीय शक्ति भी इसी तरह की है। यह एक अविवादित तथ्य है कि कम से कम कुछ आदमियों की ताकत तो है लेकिन आपके पास वित्तीय ताकत बिल्कुल नहीं है। आपके पास न ही व्यापार, न ही काम, न ही नौकरी और न ही जमीन है। उच्च जाति के लोगों द्वारा रोटी के टुकड़े बाहर फेंक दिये जाते हैं उसी से आप जीवित रहते हैं। आपके पास न ही खाना है, न ही कपड़े, आपके पास क्या वित्तीय शक्ति है? अगर आपके साथ अन्याय होता है तो आप समस्या समाधान के लिए सक्षम नहीं हैं कि आप सुधार के लिए अदालत जा सकें। हजारों अछूत अपमान सहन करते हैं, क्योंकि अदालत जाने को उनके पास धन नहीं है और निडर हिन्दुओं के हाथों तानाशाही और अत्याचार, बिना सिसकी के सहने को मजबूर हैं, क्योंकि वे अदालत के खर्चों को वहन करने में सक्षम नहीं हैं। बौद्धिक शक्ति की स्थिति भी अभी तक खराब है। सदियों से आपने न केवल उच्च जाति की सेवा की है बल्कि उसकी तानाशाही व अपमान भी झेले हैं, बिना किसी शिकायत या शिकवे के, क्योंकि आप मुंहतोड़ जवाब नहीं देते तथा विद्रोह करने के स्वर मर चुके हैं। आपमें आत्मविश्वास उत्साह और अभिलाषा लुप्त हो चुकी हैं। इस सबने आपको लाचार, उत्साहीन तथा धीमा बना दिया है। सभी तरफ अपराजय तथा निराशावादी वातावरण बना हुआ है। आपका दिमाग छोटे से विचार तक, जिससे आप कुछ कर पाऐं को पैदा होने ही नहीं देता।
| v | R; | kpk |
|---|
| d | so | y |
|---|
| D | ; |
|---|
अत्याचार केवल आप पर ही क्यों ?
मेरे द्वारा ऊपर व्यक्त तथ्य अगर सत्य हैं तो आपको इसके परिणाम से भी सहमत होना होगा। निष्कर्ष यह है कि अगर आप केवल अपनी शक्ति पर निर्भर करते हैं तो आप अत्याचार का सामना कभी भी नहीं कर पाओगे। मुझे इसमें कोई शंका नहीं है कि आप पर अत्याचार केवल इसलिए होता है क्योंकि आप में शक्ति नहीं है। यह भी नहीं कि केवल अकेले आप ही अल्पसंख्या में हैं। मुस्लिम भी आप की तरह अल्पसंख्या में हैं। महार तथा मांगों की तरह गांवों में उनके घर भी कम हैं। परन्तु मुस्लिमां को छेड़ने की हिम्मत कोई नहीं करता जबकि तुम हमेशा तानाशाही के निशाने पर हो। ऐसा क्यों हैं? यह एक स्थायी प्रश्न है और आपको इसका उचित उत्तर अवश्य ढूंढना चाहिए। मेरे विचार में इस प्रश्न का केवल एक उत्तर है कि हिन्दू इस यथार्थ को अच्छे से समझते हैं कि भारत की पूरी मुस्लिम जनसंख्या उन गांव के दो घरों के साथ है इसलिए हिन्दू उन मुस्लिमों को छेड़ना तो दूर, स्पर्ष करने तक का साहस नहीं जुटा पाते। वे गांव के दो घर स्वतंत्र और निडर जीवन गांव