29. 31.5.1936 मुक्ति का मार्ग क्या है? - Page 141

120 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

कि क्या वास्तव में इनका कुछ अर्थ है। व्यापार करने की स्वंतत्रता का आपके लिए क्या औचित्य रह जाता है जब आपको अपने पैतृक या पूर्वजों द्वारा किए गए धंधे के अतिरिक्त कोई भी दूसरा व्यवसाय करने पर समाज का प्रतिबंध है। किसी का यह कहना कि तुम्हें अपनी सम्पति तथा जायदाद का उपभोग करने की स्वतंत्रता है और कोई भी दूसरा तुम्हारे पैसों को छुएगा भी नहीं जबकि उनके लिए जायदाद बनाने के सभी मार्ग बन्द हों तो इस स्वतंत्रता के अधिकार का क्या अर्थ रह जाऐगा? एक मनुष्य जिसे समाज ने उसके जन्म के आधार पर गन्दा मानकर किसी भी सेवा के लिए अयोग्य करार दे दिया हो तथा जिसके अधीन कार्य करना उसको दूसरों को घृणास्पद लगे यह कहना कि उसे सेवा करने का अधिकार है तो यह कथन उस मनुष्य के साथ एक भद्दा मजाक ही कहा जाएगा। कानून तो आपको कई अधिकारों की गांरटी दे सकता है, परन्तु असली अधिकार तो वे ही कहलाएंगे जिनको समाज प्रयोग करने की स्वीकृति दे। कानून तो अछूतों को अच्छे कपड़े पहनने के अधिकार की गारंटी देता है परन्तु हिन्दू छूत इसकी अनुमति अछूतों को नहीं देते तो इस अधिकार का उनको क्या लाभ? कानून अछूतों को धातु के बर्तनों में पानी लाने का अधिकार, धातु के बर्तनों के उपयोग का अधिकार, घरों की छतों पर खपरैल लगाने के अधिकार की गांरटी देता है, परन्तु हिन्दू समाज उन्हें इन अधिकारों के उपयोग की अनुमति नहीं देता। तब ऐसे अधिकारों का क्या औचित्य रह जाता है? ऐसे अनेक और भी दृष्टांत उद्धृत किए जा सकते हैं, जहां कानून का उल्लंघन किया जाता है। संक्षिप्त में केवल वही अधिकार सही मायने में अधिकार कहला सकते हैं, जिन्हें समाज पालन करने दे। ऐसे अधिकार का प्रावधान जिसका सीधा विरोध समाज करता हो, का कोई लाभ अछूतों के लिए तो है नहीं। कानूनी प्रावधानों से मिली स्वतंत्रता से कहीं अधिक सामाजिक स्वतंत्रता की अछूतों को तुरंत आवश्यकता है। जब तक आपको सामाजिक गुलामी से मुक्ति नहीं मिल जाती, कानूनी अधिकारों और प्रावधानों से आपको कोई लाभ नहीं। आपको कुछ लोग सुझा सकते हैं कि आपको शारीरिक स्वतंत्रता है। निःसन्देह कानूनी प्रतिबन्ध की सीमा में आप कहीं भी जा सकते हैं और बोल सकते हैं परन्तु ऐसी स्वतंत्रता हमारे है किस काम की? मान्व के पास शरीर भी है मस्तिष्क भी। केवल शारीरिक स्वतंत्रता किस काम की। मस्तिष्क की स्वतंत्रता तो सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। वास्तव में, मनुष्य की शारीरिक स्वतंत्रता के अर्थ क्या हैं? इसके मायने हैं कि वह अपनी इच्छा से कोई कार्य करने को स्वतंत्र है। एक कैदी की हथकडि़यां तथा जंजीर खोल दी गई। इसका सैद्धान्तिक अर्थ क्या है? सिद्धान्त के अनुसार उसे अपनी स्वतंत्र स्वेच्छा से कार्य करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए और उसे अपनी योग्यताओं के अधिकतम उपयोग का अवसर प्राप्त हो। परन्तु इस सब स्वतंत्रता का उसे जिस का मस्ष्तिक स्वतंत्र नहीं हो, क्या लाभ हो