124 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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अभी तक मैंने धर्म परिवर्तन के पक्ष में विचार रखे। मैं आशान्वित हूं कि यह विश्लेषण आपके लिए विचारोत्तजक होगा। वे जो इस चर्चा से डरते उनकी
खातिर मैं सामान्य भाषा और सामान्य विचार का प्रयोग करूंगा। धर्म परिवर्तन में ऐसा नवीन क्या है? वास्तविकता के धरातल पर सवर्ण हिन्दू के साथ आपके सामाजिक संबंध किस प्रकार के हैं? आप सवर्ण हिन्दुओं से उतने ही अलग हैं, जितने मुस्लिम और इसाई हैं। क्योंकि हिन्दू अंतर्जातीय भोज या शादी की पार्टियों में मुस्लिमों और इसाईयों के यहां नहीं जाते, उनका ऐसा ही संबंध आपके साथ है। आपका समाज तथा हिन्दुओं का समाज दो भिन्न-भिन्न गुट हैं। धर्म परिवर्तन से किसी भी समाज को यह नहीं लगेगा कि उनका समाज बंट गया। आप हिन्दुओं से उतने ही अलग रहेंगे जितने आज हैं। इस धर्म परिवर्तन के कारण कुछ नया नहीं होगा। अगर यह सत्य है तो मैं यह समझने में असमर्थ हूं कि कुछ लोग धर्म परिवर्तन के नाम से क्यां डरे हुए हैं? यद्यपि आप धर्म परिवर्तन के महत्व को नहीं समझ पा रहे हैं पिफर भी आप नाम बदलने के महत्व को अवश्य समझ गये हैं। अगर आप में से किसी से भी उसकी जाति पूछें तो वह उत्तर देता है चोखामेला, हरिजन इत्यादि, परन्तु वह यह नहीं कहता कि वह महार है। कोई भी कुछ शर्तें पूरी किये बगैर अपना नाम नहीं बदल सकता। ऐसे नाम परिवर्तन के पीछे सीधा सा कारण है। एक अनजान आदमी छूत तथा अछूत का अन्तर नहीं समझ सकता और जब तक एक हिन्दू को तुम्हारी जाति की जानकारी नहीं मिलती और वह आश्वस्त नहीं हो जाता कि तुम अछूत हो, वह तुम्हारे से घृणा नहीं कर सकता। सवर्ण हिन्दू तथा अछूत जब तक वे एक दूसरे की जाति से अनजान हैं एक दूसरे से यात्रा के दौरान बहुत अच्छा व्यवहार करते हैं, वे एक दूसरे से पान, बीड़ी, सिगरेट, फल आदि का अदान प्रदान भी करते हैं। परन्तु जैसे ही हिन्दू को पता चलता है कि वह एक अछूत से बात कर रहा है तो उसके दिमाग में घृणा के कीटाणु अंकुरित होने लगते हैं। वह विचार करता है कि उसे धोखा दिया गया है। वह क्रोधित होता है और अन्त में वह अस्थाई मित्रता गालियों तथा झगड़े से समाप्त होती है। मुझे विश्वास है कि आप को ऐसे अनुभव हुए हैं। आपको अवश्य मालूम है कि ऐसा क्यों होता है? तुम्हारी जातियां के नाम उन्हें इतने मलिन लगते हैं कि उन शब्दों की ध्वनि से ही सवर्ण हिन्दू को उल्टी होने जैसा अनुभव होता है। इसलिए, अपने आप को महार न कह चोखामेला बोल कर आप लोगों को धोखे में रखना चाहते हो। लेकिन आपको मालूम है कि लोग भुलावे में नहीं आते। चाहे आप अपने को चोखामेला कहो या हरिजन लोग समझ लेते हैं कि आप कौन हो। अपने कृत्यों से आपने नाम परिवर्तन की आवश्यकताओं को सिद्ध