29. 31.5.1936 मुक्ति का मार्ग क्या है? - Page 156

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हुए हैं और दूसरी कई जातियां भी पिछड़ी हुई है। इन पिछड़ी जातियों के लिए हमने कोई राजनैतिक संरक्षण नहीं दिया है। तब आपको संरक्षण क्यों दिया जाए? आप गहन सोच के लिए मजबूर हो जाओगे। आपके इन प्रश्नों का क्या उत्तर होगा। मुस्लिम और ईसाईयों के लिए इसका उत्तर देना आसान रहेगा। वे कहेंगे ‘‘हमें राजनैतिक संरक्षण तथा अधिकार गरीबी, निरक्षरता या पिछड़ेपन के आधार पर नहीं दिये गये थे। परन्तु इसलिए दिए गए थे कि हमारा धर्म अलग है, हमारा समाज अलग है इत्यादि। और राजनैतिक अधिकारों में हमारा भाग अवश्य मिलना चाहिए और जब तक हमारा धर्म अलग है ये अधिकार मिलते रहने चाहिए।’’ यह उनका उपयुक्त उत्तर होगा। जब तक आप हिन्दू धर्म के अन्तर्गत रह रहे हैं तथा हिन्दू समाज में रह रहे हैं तब आप यह तर्क जब तक नहीं दे पाएंगे कि राजनैतिक संरक्षण का आपका अधिकार इसलिए बनता है कि आपका समाज अलग है। जिस भी दिन आप हिन्दू दासता से मुक्ति पाने के लिए धर्म परिवर्तन करके हिन्दू समाज से स्वतंत्र हो जाते हैं तो उसी दिन से आप यह तर्क दे पाओगे, अन्यथा नहीं। और जब तक आप स्वतंत्र निर्णय नहीं लेतेतब तक आप राजनैतिक संरक्षण तथा राजनैतिक अधिकारों का दावा नहीं कर सकते और आपके संरक्षण अधिकारों के स्थायित्व तथा सुरक्षा का संकट बना रहेगा, मेरे विचार से यह अज्ञानतावश होगा। इस परिप्रेक्ष्य में देखें तो यह कहा जा सकता है कि धर्म परिवर्तन कोई बाधा नहीं है बल्कि राजनैतिक संरक्षण को शक्तिशाली बनाने का एक मार्ग है।

यदि आप हिन्दू धर्म में ही बने रहते हो तो आप अपने राजनैतिक अधिकार

खो बैठोगे। यदि आप अपना राजनैतिक संरक्षण नहीं खोना चाहते तो धर्म परिवर्तन करो। केवल धर्म परिवर्तन से ही ये अधिकार स्थायी होंगे।

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मैं अपना नर्णय ले चुका हूं। मेरा धर्म परिवर्तन निश्चित है। मेरा धर्म परिवर्तन किसी भौतिक लाभ के लिए नहीं है। ऐसा कुछ नहीं है जो कि मैं अछूत रहकर प्राप्त नहीं कर सकता। मेरा धर्म परिवर्तन केवल आध्यात्मिकता पर आधारित है। हिन्दू धर्म मेरे प्रष्नों पर खरा नहीं उतरता। हिन्दू धर्म का मेरे आत्मसम्मान के संग मेल नहीं बैठता। परन्तु आपके लिए आध्यात्म तथा भौतिक लाभ के लिए धर्म परिवर्तन आवश्यक हैं। कुछ लोग धर्म परिवर्तन से भौतिक लाभ पाने के विचार पर मजाक बनाकर हंसते हैं। मैं ऐसे लोगों को मूर्ख पुकारने में जरा भी नहीं हिचकिचाता हूं। एक धर्म जो कि उपदेश देता है कि मृत्यु के बाद आत्मा का क्या होगा या क्या नहीं होगा केवल धनवानों के लिए उपयोगी हो सकता है। वे धनवान संभवतः अपने खाली समय में इस तरह के धर्म के बारे में सोचकर अपना मनोरंजन कर सकते हैं। यह पूर्णतया प्राकृतिक है कि वे जो अपने जीवनकाल में पूरी खुशियां पा चुके हैं, संभवतः इस तरह के धर्म को