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सब बिन्दुओं के उत्तर दूं। मेरा मत है कि धर्म परिवर्तन की घोषणा के महत्व को समझे बिना धर्म परिवर्तन नहीं होना चाहिए और अन्ततः मैं इस समस्या पर विस्तार से विचार करूंगा ताकि किसी को भी इसके बारे शंका न रह जाए। मैं कह नहीं सकता कि कहां तक आप मेरे विचारों से सहमत हांगे लेकिन मेरी आशा है कि आप इस पर गम्भीरता से चिन्तन करें। मेरा विश्वास है कि भीड़ को प्रसन्न करना तथा लोकप्रिय बन जाना एक सामान्य मनुष्य के लिए अच्छा है, परन्तु एक नेता के लिए नहीं। मैं मानता हूं कि नेता वह है जो बिना डर या समर्थन, बिना दोषारोपण करते हुए लोगों को उनके लिए अच्छे और बुरे का ज्ञान देता है। यह मेरा कर्त्तव्य है कि मैं आपको बताऊं कि आपके लिए क्या अच्छा है चाहे यह आपको न भाये। मुझे अपना कर्तव्य निभाना है और अब मैंने इसे निभा दिया है। अब आप फैसला लें और अपने उत्तरदायित्व को निभायें। मैंने धर्म परिवर्तन की समस्या को दो भागों में विभाजित किया है। या तो हिन्दू धर्म छोड़े या इसमें बने रहें, समस्या का पहला भाग है। अगर हिन्दू धर्म सदैव के लिए परित्याग करते हैं, कौन सा दूसरा धर्म अपनाना चाहिए या कोई नया धर्म अपनाना चाहिए यह समस्या का दूसरा भाग है। आज मुझे समस्या के पहले भाग पर फैसला लेना है। जब तक हम पहले भाग का फैसला न कर लें दूसरे के बारे में चर्चा करना व्यर्थ है। हमें पहले बिन्दु पर फैसला लेना आवश्यक है। मेरे लिए फैसले के लिए दूसरा मौका देना सम्भव नहीं होगा। आप इस सभा में क्या निर्णय लेते हैं इसके अनुसार मुझे भविष्य की रूपरेखा तैयार करनी होगी। अगर आप धर्म परिवर्तन के विम्द्ध फैसला लेते हैं तो यह अध्याय हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा। तब मुझे स्वयं के लिए करना है वह करूंगा। अगर आप धर्म परिवर्तन के पक्ष में फैसला लेते हैं तो आपको मुझे वादा देना होगा कि भारी मात्रा में संगठित हों हम धर्म परिवर्तन करें। अगर फैसला धर्म परिवर्तन के पक्ष में लेना है और लोग व्यक्तिगत तौर पर किसी धर्म को पसंद करते हैं और अकेले या परिवार में अपनाते हैं तो मैं आपके धर्म परिवर्तन में हस्तक्षेप नहीं करूंगा। मैं आशा करता हूं कि आप सब मुझसे जुड़ें हैं। जो कोई धर्म आप स्वीकार करते हैं, मैं पूरी तरह से उस धर्म में लोगों की अच्छाई के लिए प्रयास तथा सेवा करने के लिए तैयार हूं। भावनाओं में बहकर मेरा अनुसरण न करें क्योंकि मैंने ऐसा कहा है। आप इसकी स्वीकृति तभी दें, जब आप इससे आश्वस्त हों। मुझे बिल्कुल भी अफसोस नहीं होगा, अगर आप मुझसे न जुड़ने का फैसला लेते हैं। बल्कि मुझे कर्त्तव्यों के दायित्व की मुक्ति से राहत मिलेगी। आपको यह बात स्मरण रहे कि यह एक गम्भीर स्थिति और अवसर हैं। आपका आज का फैसला आने वाली पीढि़यों के लिए सुनहरा भविष्य होगा। अगर आप स्वतंत्र होने का फैसला करते हैं तो आगे की पीढि़यों का भविष्य पूर्णतः स्वतंत्र होगा। अगर आप दास बने रहने का फैसला लेते हैं, तो आपकी पीढि़यों का भविष्य