142 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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किसी षड्यंत्र का शिकार न बनें
यूरोप जाने से पहले डॉ. बी. आर अम्बेडकर ने रविवार 8 नवंबर, 1936 को प्रातः 9 बजे ‘समता सैनिक दल’ की एक आम बैठक बुलाई। यह बैठक दामोदर हाल, परेल, बंबई में आयोजित की गई और इसकी अध्यक्षता डॉ. अम्बेडकर ने की। ख्1,
बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. अम्बेडकर ने कहा,
‘‘मैं कल कुछ तात्कालिक प्रकृति के बहुत महत्वपूर्ण कार्य के संबंध में यूरोप जा रहा हूं। मेरी अनुपस्थिति में आपको यह भारी जिम्मेदारी संभालनी होगी। आपको ये पता ही होगा कि नए संविधान के अनुसार विधान सभा में दलित वर्गों के लिए पंद्रह सीटें आरक्षित की गई हैं। विधान सभा के लिए चुनाव अगले वर्ष फरवरी में आयोजित किए जाएंगे। हमको ये पंद्रह सीटें प्रांत के विभिन्न जिलों में आबंटित की गई हैं। मैंने इन सीटों के लिए चुनाव लड़ने के वास्ते इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी से उम्मीदवारों को नामित किया है। आने वाले चुनाव लड़ने के लिए मैंने और मेरे साथियों ने इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी को गठित करने को क्यों चुना? यही वह प्रश्न है जिस पर मैं इस बैठक में चर्चा करने जा रहा हूं। भारत में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस जैसी सगठित और मजबूत पार्टी के होते हुए एक नई पार्टी बनाने की क्या आवश्यकता थी, यह एक ऐसा तर्क संगत प्रश्न है जिसे अनेक व्यक्ति पूछना चाहेंगे। इसका उत्तर बहुत सीधा सा है।
कांग्रेस का मुख्य उद्देश्य स्वतंत्रता प्राप्त करना है। मेरे साथी और मैं भी स्वतंत्रता प्राप्त करना चाहते हैं लेकिन स्वतंत्रता प्राप्त करना इतना साधारण और आसान कार्य नहीं है। यहां तक कि महात्मा गांधी द्वारा विकसित किए गए ‘सत्याग्रह’ के हथियार के भी बहुत प्रभावी होने की संभावना नहीं है। असहयोग और सविनय अवज्ञा के साथ भी स्वतंत्रता प्राप्त कर पाना संभव नहीं है। यह हमारी क्षमता से निश्चित रूप से परे है। ऐसा प्रतीत होता है कि सभी लोग इसी ढंग से सोच रहे हैं। यदि यह इतना कठिन है, तो फिर स्वतंत्रता प्राप्त करने के ऐसे निरर्थक स्वप्न देखने का क्या मतलब है। जब तक हममें वास्तविक स्वतंत्रता प्राप्त करने की शक्ति और क्षमता नहीं होगी, तब तक हमें हमारा उद्देश्य प्राप्त करने के लिए भलीभांति परखी हुई विधियों का अनुसरण करना ही बुद्धिमत्तापूर्ण और लाभकारी होगा। मैं समझता हूं कि यही सही दृष्टिकोण है।
1 जनता : 5 दिसंबर, 1936