33. 30.5.1937 हम अपने दुखों को जारी नहीं रख सकते। - Page 169

148 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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हम अपने दुखों को जारी नहीं रख सकते

बंबई में कामगार मैदान परेल में इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी के तत्वावधान में 30 मई, 1937 को एक बड़ी बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का आयोजन विशेष रूप से उन प्रतिनिधियों को बधाई देने के लिए किया गया था, जो कार्यकारी परिषद के चुनाव में चुने गए थे। डॉ. पी. जे. सोलंकी ने इस बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक के लिए लगभग 15000 लोग एकत्र हुए जिनमें लगभग 1200 महिलाएं थीं। समता सैनिक दल की विभिन्न इकाइयों को इस बैठक की व्यवस्था के लिए विशेष रूप से बुलाया गया था। ख्1,

‘‘इस बैठक में डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने अपने विचारों को दोहराया और नए संविधान, जो दलित वर्गों के सर्वोत्तम हितों के अनुरूप हो, के लिए कार्य करने के संबंध में अपने दृढ़ निश्चय को व्यक्त किया। कांग्रेस पार्टी से खेल खेलने और अवरोध को समाप्त करने की अपील करते हुए उन्होंने कांग्रेस पार्टी को चेतावनी दी और कहाः ‘‘हम उस समय तक अपने दुखों को जारी नहीं रहने दे सकते जब तक कि कांग्रेस के साम्राज्यवाद के खिलाफ तथाकथित लड़ाई समाप्त नहीं हो जाती’’। अपने भाषण में उन्होंने जवाहर लाल नेहरू जैसे कांग्रेसी नेताओं द्वारा अपनाए गए दृष्टिकोण की निंदा की, जिन्होंने इन सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए दलित वर्ग से चुने गए कुछ नौकरों को उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने इस दृष्टिकोण के संबंध में एक मामले के रूप में नेहरू के हरी नामक नौकर का संदर्भ दिया। उन्होंने अंतरिम मंत्रिमंडल में कार्यभार क्यों नहीं संभाला, इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे किसी मंत्रिपरिषद् में पद को स्वीकार करना किसी काम का नहीं था जिसका विधान सभा में कोई बहुमत न हो और जिसके बहुत दिन तक रहने की कोई संभावना न हो’’। ख्2,

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12 जनता, 12 जून, 1937 कीर, पृष्ठ 293