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‘‘31 जुलाई, 1937 को डॉ. बी. आर. अम्बेडकर एक व्यावसायिक दौरे पर धूलिया गए थे। चालीसगांव स्टेशन पर दलित वर्गों द्वारा उनका भव्य स्वागत किया गया। सुबह 8 बजे धूलिया पहुंचने पर जोरदार प्रशंसात्मक स्वागत और एक नए नारे - ‘‘अम्बेडकर कौन है?’’ ‘‘अम्बेडकर हमारा राजा है!’’ के साथ उनका स्वागत किया गया। इसके पश्चात डॉ. अम्बेडकर को एक जुलूस में यात्री बंगला ले जाया गया। न्यायालय का कार्य पूरा हो जाने के पश्चात दोपहर में उन्हें हरिजन सेवक संघ के बर्बे द्वारा एक चाय पार्टी दी गई।
शाम को डॉ. अम्बेडकर ने विजयानंद थियेटर में एक बैठक को संबोधित किया।
अपने भाषण में उन्होंने कहा कि दिमाग में रखने वाली मुख्य बात यह है कि ब्रिटिश शासक जो अछूतों के प्रति उदासीन थे, के स्थान पर अब ऐसे नेता आ गए हैं जो एक ऐसी पार्टी से संबंध रखते हैं जो दलित वर्गों की सामाजिक दमनकर्ता है। उन्होंने आगे कहा कि वे ऐसे दिन थे जब संघ संगठित था और अछूतों के दृष्टिकोण से सावधानी बरतता था। उन्होंने आगे यह उल्लेख किया कि किस प्रकार से कांग्रेस द्वारा बनाए गए मंत्रिमंडलों के माध्यम से ब्राह्मणवाद भारत में पनप रहा है। उन्होंने टिप्पणी की कि कांग्रेस के सभी मंत्रिमंडल का नेतृत्व ब्राह्मणों के हाथ में है और कोई भी मंत्री दलित वर्ग का नहीं है।’’ ख्1,
1 कीर, पृष्ठ 294