154 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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साम्यवादियों ने मजदूरों का शोषण किया है
‘‘डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने सितंबर, 1937 की शुरुआत में मासुर में दलित वर्गों के एक जिला स्तरीय सम्मेलन की अध्यक्षता की।
अपने भाषण के दौरान उन्होंने श्रोताओं को बताया कि उनका यह दृढ़ विचार है कि गांधीजी वो व्यक्ति नहीं थे जिन्होंने कामकाजी वर्गों और गरीबों के हितों को ध्यान में रखा हो। अगर कांग्रेस कोई क्रांतिकारी संगठन होता तो वे इसमें शामिल हो जाते। लेकिन उनका विश्वास था कि यह क्रांतिकारी संगठन नहीं है। कांग्रेस में सामाजिक और आर्थिक समानता के आदर्शों का दावा करने के लिए पर्याप्त साहस नहीं था जिससे कि आम आदमी अपने आपको आराम और स्वतंत्रता के साथ अपनी पसंद के अनुसार विकसित कर सकता। उन्होंने कहा कि ऐसा तब तक संभव नहीं है जब तक कि उत्पादन के साधनों पर अपने निजी स्वार्थों के चलते कुछ व्यक्तियों का नियंत्रण जारी है। उन्होंने कहा कि गांधीवाद के अनुसार किसान को दो प्राकृतिक बैलों के साथ तीसरे बैल के रूप में हल के साथ उपयोग में लाया जाएगा।
साम्यवादियों द्वारा चलाए जा रहे श्रमिक आंदोलन के संबंध में उन्होंने कहा कि उनके द्वारा इस आंदोलन में शामिल होने की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने यह घोषणा की कि वे निश्चित तौर पर साम्यवादियों के एक दुश्मन हैं, क्योंकि उन्होंने अपने राजनैतिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए श्रमिकों का शोषण किया है।’ ख्1,
1 कीर, पृष्ठ 295-296