38. 31.12.1937 आत्मसम्मान और आत्मरक्षा आंदोलन के पास खोने के लिए कुछ नहीं है, किंतु पाने के लिए सब कुछ है। - Page 177

156 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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कुछ नहीं है किंतु पाने के लिए सब कुछ है

शोलापुर जिले के दौरे के समय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर 31 दिसंबर, 1937 को दोपहर में पंढरपुर पहुंचे। इसके पश्चात उन्हें एक जुलूस में यात्री बंगला ले जाया गया। पंढरपुर नगरपालिका के अध्यक्ष उनसे बंगले में आकर मिले और उसके पश्चात दोनों ही सम्मेलन के लिए गए जो म्युनिसिपल धर्मशाला में आयोजित किया गया था। आसपास और दूरदराज के क्षेत्रों के व्यक्ति अपने महान नेताओं को सुनने के लिए एकत्र हुए। 1000 से अधिक महिलाएं भी वहां उपस्थित थीं।

डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि इस समय तीन समस्याएं हमारे सामने हैं। पहली यह कि क्या उन्हें कभी भी हिंदू समाज में समान स्थिति प्राप्त होगी; दूसरी क्या उन्हें कभी भी राष्ट्रीय समृद्धि में समान हिस्सा मिलेगा; और तीसरी कि आत्मसम्मान, आत्मरक्षा आंदोलन का भविष्य क्या होगा? पहली के संबंध में उन्होंने कहा ऐसा तब तक संभव नहीं है जब तक कि जातिप्रथा विद्यमान है। दूसरी के संबंध में उन्होंने पूंजीपतियों द्वारा शासित कांग्रेस से मिले व्यवहार पर कड़ा असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा जब तक कांग्रेस पूंजीपतियों के हाथों में है तब तक वे अपनी आर्थिक स्थिति की बेहतरी के लिए वर्तमान सरकार पर भरोसा नहीं कर सकते। उन्होंने आगे कहा कि इसीलिए पूंजीपतियों, जो उनके शोषण के लिए आतुर हैं, के विरुद्ध एक संयुक्त मोर्चा बनाया जाना आवश्यक है। उन्होंने उनको बताया कि आर्थिक स्वतंत्रता को प्राप्त करने के लिए अब सही समय आ चुका है। तीसरी के संबंध में उन्होंने कहा कि उन्हें एक बात याद रखनी चाहिए कि उनके पास खोने को कुछ भी नहीं है और इस प्रयास से पाने के लिए सब कुछ है। उन्हें केवल अपने मन से मृत्यु के भय को भगाना होगा।

इस सम्मेलन ने अपने नेता द्वारा सभा में लाए गए महार वतन विधेयक का पूर्णरूप से समर्थन किया।

इसके पश्चात डॉ. अम्बेडकर को म्युनिसिपल हाल ले जाया गया। सदस्यों ने प्रसन्नतापूर्वक उनका स्वागत किया। अध्यक्ष ने इस अवसर पर एक भावभीना भाषण दिया और अतिथि को माला पहनाई। डॉ. अम्बेडकर ने उनकी भावनाओं का सम्मान किया और उन सभी को धन्यवाद दिया।’’ ख्1,

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