160 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
उसी प्रकार से करते हैं जैसे कि भेड़ें, गड़रिए के पीछे चलती हैं....
‘‘मुझे विश्वास है कि यदि ऐसा ही जारी रहा तो यह देश राजनीतिक प्रगति से कोई भी लाभ प्राप्त नहीं कर सकेगा जो इसने इस अधिनियम के अंतर्गत प्राप्त किया है। डॉ. अम्बेडकर ने जोर देते हुए कहा, ‘‘लोकतंत्र को यह समझ लेना चाहिए कि इसकी सुरक्षा इसी बात में निहित है कि किसी विशेष समस्या के समाधान के संबंध में एक से अधिक मत हों, और लोगों को उनके विचारों के साथ सहायता प्रस्तुत करने के लिए तत्पर होने के वास्ते लोकतंत्र को ऐसे व्यक्तियों को सम्मानपूर्वक ढंग से सुनना सीख लेना चाहिए जो कि सुने जाने योग्य है।’’ ख्2,
भाषण को समाप्त करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘मुझे इस बात की खुशी है कि शोलापुर नगरपालिका ने मुझे, जो किसी ऐसे संगठन से संबंध नहीं रखता है जो देश में एकमात्र संगठन होने का दावा करता हो और जिसे सभी लोग वर्तमान में मान्यता देने के पक्ष में हों, नागरिक अभिनंदन प्रदान करके एक उदाहरण प्रस्तुत किया है।’’ ख्3,
* कीर और भारिल ने 4 जनवरी, 1938 के टाइम्स ऑफ इंडिया से इस भाषण के सार लिए हैं। कीर ने इस समारोह की तारीख 4 जनवरी, 1938 बताई है जबकि भारिल ने 1938 । पर 8 तथा 15 जनवरी और 5 फरवरी, 1938 के जनता और मांग समुदाय सम्मेलन की रिपोर्ट को पढ़ने में यह पता चलता है कि डॉ. अम्बेडकर उपरोक्त समारोह में 1 जनवरी, 1938 में उपस्थित हुए थे - संपादक। 123 कीर, पृष्ठ 298-299 इन्होंने भी 4 जनवरी, 1938 के टाइम्स ऑफ इंडिया का संदर्भ लिया। टाइम्स ऑफ इंडिया, 4 जनवरी, 1938, पुनर्मुद्रित भारितल्ल पृष्ठ 190-191 कीर, पृष्ठ 299