42. 10.1.1938 किसानों और कामगारों को अपनी गरीबी के कारणों को समझना चाहिए। - Page 182

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किसानों और कामगारों को अपनी गरीबी के कारणों से ऊपर

विचार करना चाहिए

डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने 10 जनवरी, 1938 को बंबई में काउंसिल हाल तक किसानों के एक जुलूस का नेतृत्व किया। थाना, कोलाबा, रत्नागिरी, सतारा और नासिक जैसे दूरदराज के जिलों से किसान ट्रेनों और स्टीमरों में बंबई आए। फटे कपडें पहने, कंधों पर कंबल और बंडलों, और हाथों में सामान के साथ वे अपने दुखों को आवाज देने के लिए बंबई आए। उनके धूप से जले हुए चेहरे एक विशेष प्रकार के उत्साह से चमक रहे थे। उन्होंने जुलूसों के रूप में तीन दिशाओं से काउंसिल हाल की ओर मार्च कियाः एक परेल की ओर से, दूसरे अलक्जांड्रा गोदी की ओर से और तीसरे चौपाटी की ओर से। पुलिस के घेरे में वे लोग निर्धारित मार्गों पर धीरे-धीरे चले। महत्वपूर्ण स्थानों पर पुलिस दल तैनात किए गए थे। प्रदर्शनकारियों के पास खोटती प्रणाली मुर्दाबाद, ‘‘डॉ. अम्बेडकर के विधेयक का समर्थन करें’’ जैसे नारे लिखे हुए पोस्टर थे। प्रदर्शनकारी दोपहर में 1.30 बजे विक्टोरिया टर्मिनस के पास स्पेलेनेड मैदान पहुंचे। वहां पर पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को रोक दिया और 20 नेताओं को मुख्यमंत्री जिन्हें तब प्रीमियर कहा जाना था, से बातचीत करने की अनुमति दी। डॉ. अम्बेडकर के नेतृत्व में पारूलेकर, एस. सी. जोशी, डी. डब्ल्यू. राउत, इंदुलाल यागनिक और ए. वी. चित्रे प्रीमियर से मिले।

प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत की गई पहली मांग कृषि मजदूरों के लिए मजदूरी के न्यूनतम मानक लागू करनी की थी। दूसरी मांग यह थी कि किराए के सभी बकाया माफ कर दिए जाएं क्योंकि राजस्व के बकाया भी माफ किए जा चुके हैं। उन्होंने आग्रह किया कि खोटती प्रणाली और इनामदार प्रणाली को मुआवजे के साथ अथवा बिना, समाप्त करने के लिए तत्काल कानून बनाया जाना चाहिए; और भू-स्वामीवाद जोकि आर्थिक रूप से फिजूलखर्ची है और सामाजिक रूप से निरंकुशता, उसे भी समाप्त होना चाहिए। अंतिम मांग छोटे जोतधारकों द्वारा भुगतान की जाने वाली सिंचाई दरों में 50 प्रतिशत की कमी करना था। प्रीमियर ने प्रतिनिधियों को यह बताया कि प्रत्येक समस्या पर मंत्रिमंडल अपने हिसाब से कार्य कर रहा है।

नेतागण एस्पेलेनेड मैदान लौटे और वहां उन्होंने एक विशाल सभा को