164 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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ट्रेड यूनियनों को अपने हितों की रक्षा के लिए राजनीति में
प्रवेश करना चाहिए
‘ग्रेट इंडियन पेनिनसुला’ (जीआईपी) रेलवे के ‘अछूत’ कामगारों का एक
सम्मेलन 12 और 13 फरवरी, 1938 को मनमाड़ में हुआ। डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने
इस सम्मेलन की अध्यक्षता करने के लिए अपनी सहमति दी और तदनुसार जीआईपी
रेलवे की सभी शाखाओं के बीच एक सूचनापरक हैंडबिल परिचालित किया गया।
इस सम्मेलन की योजना छुआछूत की परिपाटी के कारण रेलवे में ‘अछूत’
कामगारों के साथ पेश आ रही समस्याओं पर चर्चा करने के लिए बनाई गई थी।
साथ ही इस आशय की योजना भी बनाई गई थी कि इस तथ्य के बावजूद कि
भारत में रेलवे सबसे संपन्न और मजबूत संगठन है, इन हरिजनों और उनके परिवारों
की दयनीय स्थिति पर विचार किया जाए।
सम्मेलन को सफल बनाने के लिए मनमाड़, भुसावल, कल्याण, इगतपुरी,
नंदगांव, दाउंद, शोलापुर, थाणे और मुंबई के कामगारों ने डॉ. बी. आर. अम्बेडकर
के साथ इस मुद्दे पर पूर्व में चर्चा कर ली थी। इस संबंध में दिल्ली, इलाहाबाद,
लखनऊ, कानपुर, जबलपुर, रायपुर आदि की सकारात्मक प्रतिक्रिया रही।
इस सम्मेलन को अत्यंत सफल बनाने के लिए एक अपील की गई। श्री आर. आर.
पवार जोकि ‘अछूत’ रेलवे कामगारों के बीच अत्यंत लोकप्रिय थे, इस सम्मेलन
के महासचिव थे।
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर और श्री आर. आर. पवार, महासचिव ‘दलित
कामगार सम्मेलन’ मनमाड़ के बीच के पत्राचार से ऐसा पता चलता है कि किन्हीं
अपरिहार्य कारणों से डॉ. बी. आर. अम्बेडकर 29 और 30 जनवरी, 1938 को इस
सम्मेलन में भाग नहीं ले सकते थे और इसकी बजाय उन्होंने इस सम्मेलन के
लिए 12 और 13 फरवरी, 1938 (शनिवार और रविवार) की तारीखें सुझाईं। यह
पत्राचार सम्मेलन के हैंडबिल में शामिल किया गया।