166 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
प्रतिनिधियों के बैठने की व्यवस्था की गई। अध्यक्ष तथा अन्य कार्यकर्ताओं के लिए एक अलग मंच तैयार किया गया। डॉ. बी. आर. अम्बेडकर के फूलों से सजे एक विशाल चित्र के साथ विभिन्न कामगारों के फोटो लिए गए। महिलाओं, स्वागत समिति की सदस्यों और विशेष आमंत्रितों के लिए विशेष इंतजाम किए गए। शनिवार की शाम को डॉ. बी. आर. अम्बेडकर का ‘दलित कामगार नगर’ में स्वागत किया गया और इस अवसर पर जब तक उन्होंने मंच पर स्थान ग्रहण नहीं कर लिया बैंड पर ‘लांगलिव डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर’ ‘वर्कर्स विक्ट्री’ आदि नारे लगाए गए।
शुरू में कुछ युवकों और युवतियों ने कुछ गीत गाए। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए श्री शंकरराव साल्वे ने बहुत मेहनत की। श्री पी. एन. बंकर ने अपना स्वागत भाषण पढ़ा। श्री रामचंद्र पवार ने प्रतिनिधियों और आमंत्रितों का स्वागत किया। इस अवसर पर उन्होंने महाड के सूबेदार विश्राम गंगाराम सवादकर और भाई अनंतराव चित्रे द्वारा विशेष रूप से भेजे गए विभिन्न संदेश पढ़े।
शनिवार 12 फरवरी, 1938 को डॉ. बी. आर. अम्बेडकर को इस सम्मेलन का अध्यक्ष चुना गया। अध्यक्ष के रूप में उनके चुनाव का श्रोताओं ने जोरदार तालियां बजाकर स्वागत किया। अध्यक्ष का स्थान ग्रहण करने और माल्यार्पण के बाद डॉ. अम्बेडकर ने एक आरंभिक भाषण दिया।
दूसरे दिन अर्थात रविवार 13 फरवरी, 1938 को किंचित देरी के साथ सम्मेलन का नियमित कार्य शुरू किया गया। ‘दलित कामगार नगर’ में डॉ. बी. आर. अम्बेडकर का भाषण सुनने के लिए सूर्य की अत्यधिक गर्मी के बावजूद बहुत सारी भीड़ इकट्ठा हुई थी। श्रोताओं द्वारा जबरदस्त तालियों के बीच वे अपना भाषण देने के लिए खड़े हुए। ख्1,
अपने भाषण में डॉ. अंबेडकर ने कहा,
‘मित्रों! यह ऐसे दलित वर्गों का सम्मेलन है जो जीआईपी ख्’, [*] रेलवे में रेल कर्मचारी के रूप में काम कर रहे हैं। इससे पूर्व दलित वर्ग इस प्रांत में और साथ ही भारत के अन्य प्रांतों में आयोजित अनेक सम्मेलनों में और अनेक अवसरों पर मिले हैं। एक दृष्टि से यह पहला सम्मेलन नहीं है। लेकिन दूसरी दृष्टि से यह अपने किस्म का पहला सम्मेलन है। दलित वर्गों ने अभी तक मुख्यतः सामाजिक शिकायतों के निवारण के लिए विरोध प्रकट किया है। उन्होंने अपनी आर्थिक शिकायतों के
1 जनता, 8 मई, 25 दिसंबर, 1937 और 22 जनवरी, 5 फरवरी, 1938
* ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे