168 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
है और इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए मेरी आलोचना की है। मैं इस तरह की आलोचना की बिल्कुल परवाह नहीं करता, यदि ये आलोचना श्रमिक नेताओं की तरफ से नहीं होती। उनकी शिकायत का मुख्य मुद्दा यह प्रतीत होता है कि दलित वर्ग के कामगारों का यह सम्मेलन आयोजित करके हम मजदूरों के बीच फूट डाल रहे हैं।
मेरे विचार से हमारे देश में कामगारों को दो शत्रुओं से निपटना पड़ता है। ये दो शत्रु हैं ब्राह्मणवाद तथा पूंजीवाद। हमारे आलोचकों की आपत्ति अंशतः इस कारण उठती है कि ये आलोचक ब्राह्मणवाद को एक ऐसे शत्रु के रूप में न मानने की भूल करते हैं जिसके साथ कामगारों को निपटना पड़ता है। जब मैं यह कहता हूं कि ब्राह्मणवाद एक ऐसा शत्रु है जिसके साथ निपटना जरूरी है तो मैं चाहता हूं कि मेरी बात को गलत न समझा जाए। ब्राह्मणवाद से मेरा आशय एक समुदाय के रूप में ब्राह्मणों की शक्ति, विशेषाधिकारों और हितों से नहीं है। मैं इस शब्द का प्रयोग इन अर्थों में नहीं कर रहा हूं। ब्राह्मणवाद से मेरा आशय स्वतंत्रता, समानता और मित्रता की भावना को नकारने से है। इन अर्थों में इस तरह की भावनाएं सभी वर्गों में है और वे केवल ब्राह्मणों तक सीमित नहीं है, हालांकि उनका मूल स्रोत ब्राह्मण ही हैं। यह ब्राह्मणवाद जोकि सर्वत्र फैला हुआ है और जो सभी वर्गों के विचारों और कृत्यों को विनियमित करता है, एक अकाट्य तथ्य है। साथ ही यह भी एक अकाट्य सच्चाई है कि यह ब्राह्मणवाद कुछेक वर्गों को विशेषाधिकारपूर्ण स्थिति प्रदान करता है। यह ब्राह्मणवाद कतिपय अन्य वर्गों को समानता के अवसर से भी वंचित करता है। ब्राह्मणवाद के प्रभाव केवल सामाजिक अधिकारों, जैसे सामूहिक भोज तथा अंतर्जातीय विवाह तक सीमित नहीं हैं। यदि ऐसा होता तो किसी को बुरा नहीं लगता। लेकिन ऐसा नहीं है। यह सामाजिक अधिकारों से हटकर नागरिक अधिकारों तक फैला हुआ है। पब्लिक स्कूलों, सार्वजनिक कूपों, सार्वजनिक वाहनों तथा सार्वजनिक रेस्तरां का प्रयोग नागरिक अधिकारों का मामला है। ऐसी प्रत्येक वस्तु जो सार्वजनिक प्रयोग के लिए है अथवा जिसका रखरखाव सरकारी निधि में से किया जाता है, प्रत्येक नागरिक के लिए उपलब्ध होनी चाहिए। लेकिन आज लाखों ऐसे लोग हैं जिन्हें इन नागरिक अधिकारों से वंचित रखा गया है। क्या इस संबंध में कोई संदेह कर सकता है कि यह सब ब्राह्मणवाद का प्रभाव है जिसे हजारों वर्षों से देश के भीतर खुला छोड़ दिया गया है और जो आज भी बिजली के तार की तरह काम कर रहा है? ब्राह्मणवाद इतना सर्वव्यापी है कि वह आर्थिक अवसरों के क्षेत्र तक को प्रभावित कर सकता है। दलित वर्ग के कामगार को लीजिए और उसके अवसरों की तुलना एक ऐसे कामगार के साथ कीजिए जो दलित वर्गों का नहीं है। रोजगार प्राप्त करने के लिए उसके पास कौन से अवसर हैं? नौकरी की