44. 13.2.1938 ट्रेड यूनियनों को अपने हितों की रक्षा के लिए राजनीति में प्रवेश करना चाहिए। - Page 195

174 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

जारी करने तक सीमित रखा हुआ है। कामगारों को संगठित करना, उन्हें शिक्षित करना तथा विरोध करने में उनकी सहायता करना ऐसे नेताओं की ड्यूटी का अंग नहीं है। वे केवल कामगारों का प्रतिनिधित्व करने और उनकी तरफ से आवाज उठाने तक प्रयासरत रहते हैं लेकिन उनसे कोई सीधा संपर्क बनाने से बचे रहते हैं। मजदूर नेताओं की एक दूसरी श्रेणी उनकी है जिनका एकमात्र प्रयोजन यूनियनों की स्थापना करना है ताकि उन्हें अपने लिए सचिव, अध्यक्ष अथवा चेयरमैन के रूप में पदासीन होने के लिए मौका मिल सके। अपने आपको उन स्थानों में बनाए रखने के उद्देश्य से वे अपनी यूनियनों को अलग और प्रतिद्वंदी सत्ताओं के रूप में रखते हैं। इस आशय की विस्मित करने वाली और शर्मनाक स्थिति देखने को मिलती है जबकि विभिन्न यूनियनों के बीच का संघर्ष कामगारों और मालिकों के बीच जो संघर्ष मौजूद हैं, यदि कोई हैं तो, उससे अधिक भयावह होता है और यह सब किसी अन्य प्रयोजन के लिए नहीं बल्कि कतिपय लोगों द्वारा यूनियनों पर कब्जा जमाने के लिए होता है जिनकी आकांक्षा अपने लिए एक नेता का स्थान ढूंढ़ने की होती है। मजदूर नेताओं का एक तीसरा वर्ग मुख्यतः साम्यवादियों का होता है। वे काफी सार्थक हो सकते हैं लेकिन मुझे यह कहने में संकोच नहीं है कि वे व्यक्तियों का एक भ्रमित निकाय है और मैं इसी क्रम में आगे यह भी कहना चाहूंगा कि कामगारों का जितना विनाश इन लोगों ने किया है उतना किसी और ने नहीं। यदि आज कामगारों की कमर पूरी तरह टूटी हुई है, यदि मालिकों का हाथ ऊपर बना हुआ है, यदि आज यूनियनवाद ईश्वर का शाप बना हुआ है तो यह मूलतः शक्तियों के दुरूपयोग का परिणाम है। साम्यवादियों ने एक समय ट्रेड यूनियनों पर यह शक्ति प्राप्त कर ली थी। उनका उद्देश्य कामगारों के बीच असंतोष पैदा करना है जैसे कि असंतोष की पहले कोई कमी थी। उनका यह मानना है कि कामगारों का असंतुष्ट निकाय एक क्रांति पैदा कर देगा तथा श्रमजीवियों का राज्य स्थापित हो जाएगा। इसलिए असंतोष पैदा करने के उद्देश्य से उन्होंने विघटन पैदा करने के लिए एक व्यवस्थित अभियान शुरू कर दिया। उन्होंने लोगों से जो हड़तालें कराईं इसके अलावा कोई अर्थ या अन्य परिणाम नहीं हो सकता कि उनकी ओर से यह विघटन पैदा करने की एक सोची-समझी कोशिश थी। एक सफल क्रांति के लिए यही काफी नहीं है कि असंतोष हो; इसके लिए राजनैतिक और सामाजिक अधिकार के औचित्य, जरूरत और महत्व को लेकर एक मजबूत और सुदृढ़ विश्वास की जरूरत है। यहां तक कि क्रांतिकारी मार्क्स भी उन हड़तालों की पूजा नहीं करेगा जैसा कि क्रांतिकारी श्रमिक संघवादियों द्वारा काफी पुराने समय में किया गया था। क्रांतिकारी मार्क्सवादियों द्वारा हड़ताल को कभी भी ‘क्रांतिकारी प्रक्रिया’ नहीं माना गया, बल्कि इसे एक ऐसा अत्यंत गंभीर उपाय समझा गया जिसका प्रयोग सभी प्रयासों के असफल प्रमाणित होने के बाद अंतिम हथियार के रूप में किया जाएगा। लेकिन साम्यवादियों