176 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
में मेरे लिए आपको कोई राय देना कठिन है। यदि आप कोई अलग यूनियन बनाते हैं तो इसमें कोई बुराई नहीं है बशर्ते कि आपके पास यूनियन को चलाने के लिए लोग मौजूद हों। यह एक बहुत बड़ी शर्त है। यदि कोई यूनियन आगे बढ़ना चाहती है तो उसे काम करना होगा और कोई भी यूनियन तब तक काम नहीं कर सकती जब तक कि वह प्रभावी कार्मिकों की सेवाएं उपलब्ध न कर सके। क्या आप ऐसे लोग जुटा सकते हैं जो यूनियन चला सकें? यदि हां तो आप स्वयं अपनी यूनियन स्थापित कर लीजिए। सच तो यह है कि यदि आप ऐसा करेंगे तो बेहतर होगा। एक अलग यूनियन स्थापित करने में कोई बुराई नहीं है क्योंकि अलग यूनियनों का परिणाम जरूरी नहीं है कि अलगाववाद अथवा कमजोरी में हो। आपकी अलग यूनियन सदैव श्रमिकों के किसी केन्द्रीय संगठन के साथ जो प्रयोजन की एकता और कार्य की एकता प्रदान कर सकता है के साथ संबद्ध की जा सकती है। यदि आप स्वयं अपनी एक अलग यूनियन का संगठन नहीं कर सकते तो आप मौजूदा यूनियनों में से किसी एक के साथ जुड़ सकते हैं। लेकिन आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि यूनियन आपका प्रयोग अपने प्रयोजनों के लिए न करे। ऐसा होने का बड़ा खतरा मौजूद है। बंबई में ऐसा हुआ है जहां हड़तालें अनिवार्यतः बुनकरों के हितों में वापिस ले ली गई हैं और कताई करने वालों का प्रयोग बुनकरों के हितों का समर्थन करने के लिए किया गया है। इस स्थिति से बचने के लिए आपको दो शर्तों का अवश्य आग्रह करना चाहिए। पहली बात तो यह कि आपको यूनियन की कार्यकारी समिति में एक विशेष प्रतिनिधि के लिए आग्रह करना चाहिए, जिससे आपकी विशेष समस्याओं को यूनियन का ध्यान और समर्थन प्राप्त होगा। दूसरे आपको इस बात का आग्रह अवश्य करना चाहिए कि यूनियन में आपके अंशदान का कुछ हिस्सा यदि जरूरी हो तो आपकी शिकायतों का विरोध करने के लिए आबंटित कर दिया जाए। यदि आप स्वयं अपना कोई अलग यूनियन बनाने का निर्णय नहीं लेते तो ये ऐसी दो अनिवार्य शर्तें हैं, जिनके आधार पर आपको सभी कामगारों की सामान्य यूनियन के साथ जुड़ना चाहिए।
इस बात का कोई सवाल नहीं है कि आपको यूनियन की स्थापना व्यापारिक प्रयोजनों के लिए करनी है। लेकिन इतना ही काफी नहीं है। आपको राजनैतिक प्रयोजनों के लिए भी संगठित होना है। अनुभव यह बताता है कि ट्रेड यूनियनवाद अपने आपमें मालिकों के विरुद्ध लड़ाई में श्रमिकों की मदद नहीं कर सकता। ट्रेड यूनियनों को राजनीति में प्रवेश करना चाहिए या नहीं, यह एक ऐसा प्रश्न है जिसके बारे में दो अलग राय नहीं हो सकती।
ट्रेड यूनियनों को राजनीति में अवश्य प्रवेश करना चाहिए, क्योंकि राजनीतिक शक्ति के बिना वे शुद्ध रूप से ट्रेड यूनियन के हितों की रक्षा नहीं कर सकते।