44. 13.2.1938 ट्रेड यूनियनों को अपने हितों की रक्षा के लिए राजनीति में प्रवेश करना चाहिए। - Page 199

178 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

बन जाएगा। जैसा कि आप शायद जानते होंगे कि दो प्रतिद्वंदी निकाय जो श्रमिकों के हित में बात करने के अधिकार का दावा करते हैं, यानी ट्रेड यूनियन कांग्रेस और ट्रेड यूनियन फेडरेशन ने अपने आपको एक निकाय के रूप में शामिल हो जाने का निर्णय लिया है। एकता लाने के लिए प्रत्येक ने आधा-आधा प्रयास किया है। ट्रेड यूनियन कांग्रेस ने ट्रेड यूनियन फेडरेशन का विधान अपना लिया है और ट्रेड यूनियन फेडरेशन अपना नाम त्यागने को सहमत हो गया है। मैं समझता हूं कि इस एकता की एक शर्त यह है कि यह संगठन शुद्ध रूप से एक ट्रेड यूनियन संगठन है। इसमें राजनीति का कोई दखल नहीं होगा। जब मैंने यह बात सुनी तो मुझे आश्चर्य हुआ कि क्या ये लोग वस्तुतः यह समझते हैं कि वह क्या कह रहे हैं। बड़े दुख की बात है कि कामगार अत्यधिक अन्याय सहन कर रहे हैं जो उन्हें मुख्यतः इसलिए भोगना पड़ रहा है कि उन्होंने इसके कारण का उन्मूलन करने की अपनी कमान का प्रयोग करने की अनदेखी कर दी है। मेरा आशय राजनैतिक शक्ति के प्रयोग से है। मैं यह नहीं समझ पा रहा हूं कि यह कैसी ट्रेड यूनियन एकता है यदि वह संयुक्त राजनैतिक कार्रवाई के लिए नहीं है। पदावली में इस आशय का कुछ अर्थ है जिसके अनुसार किसी ऐसे बिंदु पर मतभेद रखने को सहमति व्यक्त की गई है जिसके संबंध में मतभेद इतना कम अथवा नगण्य है कि इससे अन्य महत्वपूर्ण और प्रमुख बिंदुओं के बारे में सहमति पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ता। लेकिन ऐसी एकता का कोई अर्थ नहीं है जिसमें जिस बिंदु पर लोग मतभेद रखने को सहमत हों वह उतना बड़ा हो कि छोटे तथा मामूली बिंदुओं पर सहमति किसी भी रूप में किसी महत्व की न हो। दूसरे लोगों का विचार कुछ भी हो सकता है, पर मैं इतना अवश्य कहूंगा कि यदि संगठित श्रमिक वर्ग राजनीति से दूर रहने का निर्णय लेता है तो उनके श्रमिकों का भविष्य अंधकार में डूब गया है। किसी भी मूल्य पर हमें यह अवश्य महसूस करना चाहिए कि अभी तक के हमारे प्रयास सामाजिक सुधार के अकेले चैनल की तरफ निदेशित थे और यह कि हम यह बात भूल गए थे अथवा आंशिक रूप से ध्यान में रखे थे कि हमारे लिए अपने प्रयासों को आर्थिक सुधार के चैनल की तरफ निदेशित करने की जरूरत है। हमें यह अवश्य महसूस करना चाहिए कि ऐसी सभी बुराइयां जिन्हें हम झेलते हैं, उनका उद्गम एक ही है--अर्थात जो लोग हमारे ऊपर सामाजिक और आर्थिक प्रभुता बनाए रखते हैं, उन्होंने राजनैतिक शक्ति अपने हाथो में ले ली है जोकि वस्तुतः श्रमिक वर्गों की होनी चाहिए।

राजनीति में प्रवेश करने का अर्थ है एक दल का निर्माण करना। किसी दल के समर्थन के बिना राजनीति निरर्थक होती है। अनेक राजनीतिज्ञ ऐसे हैं जो स्वतंत्र रहना पसंद करते हैं, जो अपने अकेले हल को चलाते हैं। मैं सदैव ऐसे राजनीतिज्ञ