44. 13.2.1938 ट्रेड यूनियनों को अपने हितों की रक्षा के लिए राजनीति में प्रवेश करना चाहिए। - Page 201

180 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

जमींदार, मिल मालिक, साहूकार भारत में बने रहेंगे और लोगों का खून चूसते रहेंगे और साम्राज्यवाद के समाप्त होने के बाद भी श्रमिक वर्ग को इन हितों के लिए पहले की भांति ही लड़ना होगा। यदि ऐसी बात है तो श्रमिक वर्ग को अपने आपको अभी से संगठित क्यों नहीं हो जाना चाहिए। उसे अपना संगठन विकसित होने का इंतजार क्यों करना चाहिए? मुझे इसका कोई उत्तर नहीं सूझता। कांग्रेस समाजवादी स्पष्टतः ऐसा महसूस करते हैं कि श्रमिक वर्ग को पूंजीवाद के विरुद्ध उतना ही लड़ना है जितना कि साम्राज्यवाद के विरुद्ध और इसलिए वे इस बात से सहमत हैं कि श्रमिक वर्ग को अवश्य ही संगठित होना चाहिए। लेकिन उन्हांने एक शर्त रखी है कि कोई भी श्रमिक संगठन कांग्रेस के भीतर होना चाहिए। कांग्रेस और श्रमिक वर्ग के बीच इस तरह के अनिवार्य गठबंधन के गुण अथवा जरूरत की बात मेरी समझ में नहीं आती। कांग्रेस समाजवादी का उद्देश्य समाजवाद लाना है, उनका कहना यही है। कांग्रेस की दक्षिणपंथी विंग को रूपांतरित करके वे किस तरह यह सब करने की आशा करते हैं। कांग्रेस से बाहर न जाने के लिए वे यही स्पष्टीकरण देते हैं। मानवीय प्रकृति की अत्यधिक अनभिज्ञता के इससे अधिक दयनीय मामले की कल्पना नहीं की जा सकती। यदि समाजवाद लाना उद्देश्य है तो इसे लाने के लिए जनमानस के बीच इसके लिए उपदेश दिए जाने चाहिए और उन्हें इस प्रयोजन के लिए संगठित किया जाना चाहिए। जनता को लुभाने से समाजवाद आने वाला नहीं है। यह तथ्य कि कांग्रेस दक्षिणपंथी स्कंध समाजवाद की मामूली खुराक से अधिक समाजवाद को सहन नहीं करेगा एक ऐसी सच्चाई है जो दिन प्रतिदिन उभरती आ रही है। पिछले साल पंडित नेहरू ने समाजवाद के पक्ष में एक व्यापक अभियान शुरू किया था। गरीब आदमी को आदेश देने के लिए बुलाया गया और एक शरारती बच्चे की तरह उसे वापिस उसके कमरे में भेज दिया गया। उसे रोटी और पानी पर रखा गया और उसे नीचे तभी लाया गया जब सही व्यवहार करने को राजी हो गया। पंडितजी ने अब अपनी यह बात पूरी तरह वापस ले ली है और अब वह देश के वातावरण के इतने अधिक अनुकूल बन गए हैं कि वे लाल झंडे को लेकर जिसे वे फहराया करते थे, आलोचना करते हैं। लेकिन जो कांग्रेस के दक्षिणी विंग के लिए अभिशाप है। बिहार में कांग्रेस के दक्षिण विंग ने हथियार डाल दिए हैं। किसानों के नेता स्वामी सहजानंद ने कांग्रेस छोड़ दी है और उनके सहकर्मी श्री जयप्रकाश नारायण कांग्रेस छोड़ने वाले हैं। मुझे यह बताया गया है कि एआईसीसी की बंबई में हुई अंतिम बैठक में कांग्रेस समाजवादियों पर दक्षिण विंग ने कांग्रेस के मंच से समाजवाद का उपदेश देने की अनुशासनहीनता का आरोप लगाया और उनकी मामूली निंदा करके मामला

खत्म कर दिया जैसा दाण्डिक प्रक्रिया संहिता में प्रथम अपराधियों के लिए किया जाता है। कांग्रेस समाजवादियों की राजनीति की असारता यही है।