44. 13.2.1938 ट्रेड यूनियनों को अपने हितों की रक्षा के लिए राजनीति में प्रवेश करना चाहिए। - Page 202

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भारतीय राजनीति साम्राज्यवाद के विरुद्ध अपनी प्रतिक्रिया से आच्छादित हो गई है। श्रमिक वर्ग को अपने वास्तविक शत्रु अर्थात निहित स्वार्थों को भूलने के लिए कहा गया है। रायवादी और कांग्रेस समाजवादी--दोनों विचारों की भ्रांति के कारण इस दलदल में फंसे हुए हैं। यहां तक कि यदि साम्राज्यवाद के साथ एक साझा शत्रु के रूप में निपटा जाना है तो भी इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी वर्गों को अपने वर्गहित भुला देना चाहिए और किसी एक संगठन के साथ जुड़ जाना चाहिए। विभिन्न वर्ग संगठनों द्वारा साम्राज्यवाद के विरुद्ध, एक साझा मोर्चा बनाकर लड़ा जा सकता था। इस प्रयोजन के लिए सभी संगठनों को भंग करना जरूरी नहीं है। संगठनों को मिलाना जरूरी नहीं है। साझा मोर्चा काफी है। मुझे इस बात का दुख है कि कई लोग यह महसूस नहीं करते कि कांग्रेस का दक्षिणपंथी विंग केवल श्रमिकों के एक अलग और स्वतंत्र संगठन को रोकने के एक बहाने के रूप में साम्राज्यवाद का प्रयोग कर रहा है और मैं आपको इस गलती में न पड़ने के लिए चेता रहा हूं। यह जरूरी है कि राजनीति वर्ग चेतना पर आधारित हो। जो राजनीति वर्ग चेतना पर आधारित नहीं है, वह पाखंड है।

इसलिए आपको अवश्य ही किसी ऐसे राजनीतिक दल के साथ जुड़ना चाहिए जो वर्ग हितों तथा वर्ग चेतना पर आधारित हो। यदि इस कसौटी को लागू किया जाए तो मुझे इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी के अलावा कोई ऐसा अन्य दल दिखाई नहीं देता, जिसके साथ आप अपने हितों को नुकसान पहुंचाए बिना जुड़ सकते हैं। यह एकमात्र ऐसा दल है जिसका सुस्पष्ट कार्यक्रम है, जो कामगारों के हितों को पहला और सर्वोच्च स्थान देता है, जिसकी एक सुनिश्चित कार्ययोजना है जो अपने कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए सभी संवैधानिक साधनों के प्रयोग का प्रस्ताव करता है और जो तब तक असंवैधानिक साधनों का आश्रय नहीं लेगा जब तक कि उसे ऐसा करने के लिए मजबूर न किया गया हो, जो वर्ग संघर्ष से बचने का इच्छुक है लेकिन जो वर्ग संगठन के सिद्धांत को त्यागने को तैयार नहीं है। यह सच है कि इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी अपनी शैशवावस्था में है और वह केवल बंबई प्रांत तक सीमित है। लेकिन यह इसके विरुद्ध कोई दलील नहीं है। प्रत्येक दल एक अवस्था में अपने शैशवकाल में होता है। प्रश्न यह नहीं है कि कोई दल कितना पुराना है। प्रश्न यह है कि उसके कौन से सिद्धांत हैं, वह किसका समर्थन करता है, उसकी क्षमताएं कौन सी हैं। इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी के घोषणा-पत्र को पढ़ने वाला कोई भी व्यक्ति यह समझ जाएगा कि इसके सिद्धांत क्या हैं और वह किसका समर्थन करता है। यह एकदम साफ है कि इस दल की विशाल क्षमताएं हैं। यह दल कोई बंद निगम नहीं है। यह सबके लिए खुला हुआ है, चाहे उसकी जाति तथा पंथ कोई भी हो।