45. 12.2.1938 चरित्रहीन और विनम्रताहीन शिक्षित व्यक्ति जानवर से अधिक खतरनाक होता है। - Page 205

184 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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बंबई प्रांत दलित वर्ग युवा सम्मेलन, डॉं. बी. आर. अम्बेडकर की अध्यक्षता में 12 फरवरी, 1938 को रात 8 बजे जीआईपी रेलवे दलित वर्ग कामगार सम्मेलन के लिए निर्मित विशाल पंडाल में, आयोजित किया गया। स्वागत समिति के अध्यक्ष श्री मुरलीधर पगारे द्वारा स्वागत भाषण ख्1, के बाद डॉं. बी. आर. अम्बेडकर ने अत्यंत शिक्षाप्रद, प्रेरणात्मक और रोमांचक वक्तव्य दिया।

उन्होंने कहा :-

जीवन में एक नियम जो उन्हें दिमाग में रखना चाहिए, वह यह है कि उन्हें एक उत्तम आदर्श को बनाए रखना चाहिए। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रगति अथवा आत्मविकास - व्यक्ति का आदर्श कोई भी हो, उसे उस आदर्श तक पहुंचने के लिए धैर्य के साथ प्रयास करते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया में सभी बड़ी बातें धैर्यपूर्ण परिश्रम और मेहनत तथा दुख-तकलीफ के सहारे प्राप्त होती हैं। आगे चलकर उन्होंने यह कहा कि मनुष्य को अपना ध्यान और अपनी शक्ति अपने लक्ष्य पर केन्द्रित करनी चाहिए। मनुष्य को जीवित रहने के लिए खाना खाना चाहिए और समाज के कल्याण के लिए जीना और काम करना चाहिए।

इसके बाद शिक्षा की समस्या पर चर्चा करते हुए डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि शिक्षा एक तलवार है और एक दोहरी धार वाला हथियार होने के कारण इसे चलाना

खतरनाक है। चरित्रहीन और विनम्रताहीन शिक्षित व्यक्ति एक जानवर से अधिक

खतरनाक होता है। उन्होंने कहा कि यदि उसकी शिक्षा गरीब आदमी के कल्याण के प्रतिकूल है तो ऐसा शिक्षित व्यक्ति समाज के लिए अभिशाप है। ऐसे शिक्षित व्यक्ति को दुत्कारें’। उन्होंने बलपूर्वक कहा कि ‘चरित्र शिक्षा से अधिक महत्वपूर्ण है। मुझे यह कहते हुए दुख होता है कि युवा लोग धर्म के प्रति उदासीन होते जा रहे हैं। धर्म कोई अफीम नहीं है, जैसा कि कुछ लोग मानते हैं। मेरे भीतर जो भी अच्छी बातें हैं अथवा समाज को मेरी शिक्षा से जो भी लाभ प्राप्त हुआ है, उस सबके लिए मैं अपने भीतर की धार्मिक भावनाओं को श्रेय देता हूं। मैं धर्म की कामना करता हूं लेकिन मैं धर्म के नाम पर पाखंड नहीं चाहता’। सम्मेलन अत्यधिक सफल रहा। इससे यह पता चला कि मौका मिलने पर दलित वर्ग के नेता भी जनसाधारण को संगठित कर सकते हैं। ख्2,

12 जनता : 26 फरवरी, 1938 कीर, पृष्ठ 305    