188 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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विदेशी साम्राज्यवाद के साझा दुश्मन से लड़ने के लिए
संयुक्त राजनैतिक संगठन की जरूरत
डॉं. बी. आर. अम्बेडकर ने रविवार 25 दिसंबर, 1938 को दोपहर बाद अखिल भारतीय किसान सभा के अध्यक्ष स्वामी सहजानंद का स्वागत किया जिसमें अनेक श्रमिक नेता, अतिवादी और पत्रकार भी आमंत्रित किए गए थे।
अपने वक्तव्य ने डॉ. अम्बेडकर ने निम्नानुसार घोषणा कीः ‘‘मैं लिखित रूप में यह देने को तैयार हूं कि इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी और इसके प्रवक्ता के रूप में मैं इंडियन नेशनल कांग्रेस के साथ किसी भी ऐसे संघर्ष में जुड़ जाऊंगा जो वह फेडरेशन के विरुद्ध लड़ाई करने के लिए शुरू करेगी।
‘‘मैं यह बात लिखकर देने को तैयार हूं कि यदि कांग्रेस के मंत्री फेडरेशन के विरोध में अपने पदों से त्यागपत्र दे देंगे तो, प्रशासनिक तंत्र चलाने के लिए इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी खाली पदों पर नहीं बैठेगी और वह अपनी सारी शक्ति और प्रभाव का प्रयोग दूसरों को रोकने के वास्ते करेगी।’’
मैं पूरी तरह महसूस करता हूं कि हम भारत में सबसे ज्यादा भूखे जीव हैं। हम सबसे अधिक उत्पीडि़त, गरीब, दलित लोग हैं। हम इस तरह के अन्याय से ग्रस्त हैं जो किसी भी अन्य वर्ग को नहीं भोगना पड़ता। लेकिन इस घड़ी हम उच्चतर वर्गों से अपने मतभेदों को अलग रख देंगे। हम अपनी वर्गगत मांगों पर बल देना स्थगित कर देंगे और कांग्रेस के साथ जुड़ जाएंगे यदि वह साम्राज्यवाद के विरुद्ध लड़ने का फैसला करे।
यह घोषणा स्वामी सहजानंद की इस टिप्पणी के साथ शुरू हुई कि सभी व्यक्तियों को कांग्रेस के साथ जुड़ जाना चाहिए।
उनका यह मानना था कि कांग्रेस एक साम्राज्यवाद विरोधी संगठन है और उसके पास साम्राज्यवाद के विरुद्ध संघर्ष की परंपराएं हैं जिनका दावा कोई अन्य दल नहीं कर सकता, यह भी उसके नाम और उसके उद्देश्यों से देशभर में फैले लाखों करोड़ों कामगार और किसान परिचित थे और कोई भी अन्य राजनैतिक संगठन विख्यात नहीं था। अतः जनमानस की वर्गगत चेतना का निर्माण करके इसे इसके मौजूदा नेताओं से बचाया जा सकता है।