49. 25.12.1938 विदेशी साम्राज्यवाद के सामने दुश्मन से लड़ने के लिए संयुक्त राजनैतिक संगठन की जरुरत। - Page 210

189

‘‘मैं इस देश के लोगों के सभी वर्गों के एक संयुक्त राजनैतिक संगठन की जरूरत समझता हूं ताकि वे विदेशी साम्राज्यवाद के रूप में अपने साझा शत्रु के विरुद्ध लड़ सकें। एक साझा शत्रु के विरुद्ध लड़ाई होने की स्थिति में मैं सभी राजनैतिक संगठनों के अस्थायी समापन का समर्थन करूंगा। यदि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस इस तरह का संघर्ष शुरू करे तो मैं इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी का समापन करना और अपनी शक्तियां प्रसन्नतापूर्वक कांग्रेस के सुपुर्द करूंगा।’’ उत्तर देते हुए डॉ. अम्बेडकर ने कहा- ‘‘लेकिन आज की स्थिति क्या है? कांग्रेस किसी साम्राज्यवाद विरोधी संघर्ष में प्रवृत्त नहीं है। यह संवैधानिक तंत्र का प्रयोग पूंजीवादियों के हितों तथा अन्य निहित स्वार्थों को आगे बढ़ाने के लिए कर रही है, यह कामगारों और किसानों के हितों की बलि देकर उनका उत्थान कर रही है।

‘‘इसके प्रशासनिक क्रियाकलापों का गुणगान किया गया है लेकिन जनता द्वारा नहीं बल्कि स्वयं साम्राज्यवाद द्वारा जिसके विरुद्ध संघर्ष करने की कांग्रेस से अपेक्षा की जाती है।’’

‘‘अपने वर्ग हितों को आगे बढ़ाने के लिए कांग्रेस ने जो खंडित शक्तियां प्राप्त की हैं जब वह उनका लाभ उठाने में व्यस्त हैं तो अपने हितों की रक्षा करने के लिए और कांग्रेस तथा अन्य मंत्रिमंडलों द्वारा हमारे अधिकारों और स्वतंत्रताओं के हनन का विरोध करने के लिए स्वयं अपना वर्ग संगठन स्थापित करना, स्पष्ट रूप से, हमारा दायित्व बन जाता है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस के साथ जुड़ना हमारे लिए आत्महत्या करने की तरह होगा।’’

‘‘ऐसा प्रतीत होता है कि स्वामी सहजानंद की मुख्य धारणा यह थी कि कांग्रेस की मौजूदा नीति के लिए उसका गलत नेतृत्व जिम्मेदार था, यह कि मौजूदा नेतृत्व को अपदस्थ करके तथा जनसाधारण के नेताओं को पदासीन करके नीति को बदला जा सकता है और उन्हें अभी तक अपदस्थ नहीं किया गया क्योंकि जनसाधारण में वर्ग चेतना नहीं थी।

आज की तारीख में हमारा मुख्य कार्य जनसाधारण के बीच वर्ग चेतना उत्पन्न करना है और उसके बाद मौजूदा नेतृत्व स्वतः धराशायी हो जाएगा।

‘‘डॉ. अम्बेडकर ने कहा- ‘‘यहां तक कि यदि हम कांग्रेस पर काबू पा लेते हैं तो भी एक अलग संगठन की स्थापना करने के लिए मौजूदा नेतृत्व पर कोई रोक नहीं है और इस प्रकार कांग्रेस पर काबू पाने का मुख्य प्रयोजन जिसका अर्थ समूचे देश में एक राजनैतिक संगठन रखना है, पराजित हो जाता है।’’

इन सब आपत्तियों के जवाब में स्वामीजी ने कहा कि कांग्रेस ने जनसाधारण में जागृति पैदा की थी और अकेली कांग्रेस थी जिसके ऊपर वे अपना भरोसा और