194 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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‘‘इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी बंबई के नेता डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने रविवार दिनांक 29 जनवरी, 1939 की रात को पूना में गोखले स्कूल आफ इकोनामिक्स में 3 घंटे तक चले अपने भाषण के दौरान फेडरल स्कीम की एक सुविचारित प्रस्तुति की।
पहली बात तो यह कि फेडरल स्कीम देश को स्वतंत्रता की ओर ले जाने से बहुत अलग, यहां तक कि उसे डोमीनियन दर्जा दिलाने के मार्ग तक को स्थायी रूप से बंद कर देगी।
डॉ. अम्बेडकर यह चाहते थे कि केवल ब्रिटिश भारतीय प्रांतों की फेडरेशन हो।
जहां तक राज्यों का संबंध है छोटे-छोटे राज्यों के शासकों को पेंशन दे दी जानी चाहिए और बड़े राज्यों के शासकों को कतिपय शर्तों के अधीन कार्य करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
उनके अनुसार फेडरल स्कीम ने स्वतंत्र व्यक्ति और गरीब व्यक्ति को जो राष्ट्रीय नीति के सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंग होते हैं, को पूरी तरह भुला दिया था।
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर द्वारा दिए गए वक्तव्य का सार निम्नानुसार हैः
‘‘फेडरेशन के वास्तविक स्वरूप की एक स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत करने के उद्देश्य से डॉ. अम्बेडकर ने इस फेडरेशन की अन्य फेडरेशनों के साथ तुलना की और उन्होंने यह तुलना आगे वर्णित तीन महत्वपूर्ण प्रश्नों के संदर्भ में की। अर्थात (i) फेडरेशनों के यूनिट कौन से हैं, (ii) फेडरेशन के साथ इन यूनिटों का क्या संबंध है, ;पपपद्ध उन व्यक्तियों का क्या संबंध है जिन्हें फेडरेशन की प्रभुसत्ता के अधीन लाया जाता है।
इस संबंध में उन्होंने यह संप्रेक्षित किया की ‘‘........फेडरेशन साझा नागरिकता