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सहित एक साझापूर्ण इकाई नहीं है। फेडरेशन एक संग्रह है, कानून में जिसका आशय विदेशी राज्यों से है। फेडरेशन वस्तुतः एक कंफेडरेशन है। इसकी जो विशिष्टताएं और विशेषताएं हैं वे कंफेडरेशन की हैं। यदि लोग इसे फेडरेशन कहने का आग्रह करते हैं तो यह केवल फेडरेशनों के बीच मात्र एक विरूप ही नहीं है बल्कि यह फेडरेशनों के बीच भी एक विरूपता है।’’
फिर डॉ. अंबेडकर ने उन आधारों की जांच की जिनके बल पर स्कीम की स्वीकृति के पक्ष में आग्रह किया गया था, अर्थात -
( i ) यह भारत के संगठित होने में सहायता करती है।
( ii ) यह ब्रिटिश भारत को भारतीय भारत को प्रभावित करने और भारतीय भारत
में प्रचलित एकतंत्र को धीरे-धीरे मौजूदा ब्रिटिश भारत में व्याप्त लोकतंत्र
में बदलने में समर्थ बनाती है।
( iii ) इस स्कीम में वह शामिल है जिसे जिम्मेदार सरकार कहा जाता है।
जहां तक (i) का संबंध है उन्होंने कहा कि व्याख्यपित शब्द भारतीय भारत
के अधीन जो कुछ शामिल था वह फेडरेशन के अधीन लाया गया। अधिनियम
की अनुसूची के साथ खंड 6(i) के पढ़ने पर प्रत्येक राज्य के लिए फेडरेशन
में शामिल होने की छूट नहीं थी जिसके फलस्वरूप 498 राज्य अभी भी
फेडरेशन से बाहर बने हुए हैं और वह कभी भी फेडरेशन का हिस्सा नहीं
बन सकते। डॉ. अम्बेडकर ने पूछा कि ये राज्य फेडरेशन से अलग क्यों
रखे गए हैं, उनकी क्या स्थिति और नियति है।
( iv ) के बारे में चर्चा करते हुए डॉ. अम्बेडकर इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि राज्य
विधि द्वारा ऐसी स्थिति में रखे गए थे कि वे ब्रिटिश भारत के कामकाज
पर नियंत्रण रख सकें और उसी विधि द्वारा ब्रिटिश भारत को राज्यों के
ऊपर कोई प्रभाव डॉलने के अयोग्य बना दिया गया। उनकी राय में फेडरल
स्कीम से कोई सहायता नहीं मिली, निश्चय ही इस कारण ब्रिटिश भारत
ऐसी प्रक्रियाओं को गति देने से बाधित हो गया, जिनके फलस्वरूप भारतीय
राज्यों का लोकतंत्रीकरण हो पाता।
दूसरी तरफ इसने ब्रिटिश भारत के भारतीय राज्यों में लोकतंत्र को नष्ट करने में मदद की।
जहां तक (iii) का संबंध है उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी का विस्तार रक्षा