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मैंने किसी एक विशिष्ट वर्ग के लाभ के लिए नहीं, बल्कि पूरे
समुदाय के लाभ के लिए काम किया
आर. एम. भट्ट हाई स्कूल, परेल, बंबई में रविवार 2 जुलाई, 1939 को
आयोजित रोहीदास शिक्षण समाज की बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. बी. आर.
अम्बेडकर ने कहा कि -
‘‘वे दलित वर्गों के बीच उप-जातियों के उन्मूलन के पक्ष में थे और वे
निष्ठापूर्वक इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए काम करते रहे। आगे उन्होंने यह कहा
कि विवाह का प्रश्न ऐसा नहीं है जो ताकत के बल पर सुलझाया जा सके। उन्होंने
कहा कि ऐसा नहीं है कि कोई महार लड़की और चमार लड़का अथवा मांग लड़के
की इस तरह जबरदस्ती शादी कर दी जाए जैसे कि जादू की छड़ी घुमाकर की
जाती है। जिन पुरुषों ने इस तरह के विवाह करने का साहस किया है, उनको
प्रोत्साहित करने का काम उनका है। राजनैतिक समस्या पर चर्चा करते हुए उन्होंने
कहा कि कांग्रेस के नेता दलित वर्ग के कुछ नेताओं को चालाकी से उनके दल
के विरुद्ध प्रोत्साहित करके दलित वर्गों के बीच फूट डालने में लगे हुए हैं। उन्होंने
उनसे अनुरोध किया कि वे कांग्रेस के झूठे प्रचार के चक्कर में न आएं। उन्होंने कहा
कि कांग्रेस के नेता हरिजन नेताओं को खुश करने में लगे हुए, हैं क्योंकि वे कांग्रेस
के शिविर में शामिल नहीं थे। उन्होंने कहा कि यह सच है कि आईएलपी को प्रमुख
समर्थन महारों से प्राप्त हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसमें उनकी कोई गलती
नहीं है कि दलित वर्गों में महारों की बहुलता है।’’ ख्’, तथापि अपनी समापन टिप्पणी
में उन्होंने यह कहा कि इन भेदपूर्ण भावनाओं से मुक्ति पाने का एकमात्र तरीका यह
है कि किसी दूसरे धर्म को अपना लिया जाए।’’ ख्1,
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर के वक्तव्य में अतिरिक्त आयाम भी थे जो ‘‘दि
टाइम्स आफ इंडिया’’ द्वारा प्रस्तुत किए गए। ये आयाम निम्नानुसार थेः संपादक
‘‘यह एक दुख की बात है कि दलित वर्गों के विभिन्न प्रवर्गों के बीच मतभेद
* 1 कीर,पृष्ठ 323-324दि जनता : 8 जुलाई, 1939