203
56
करों का उपयोग किसानों के हित में किया जाना चाहिए
‘‘डॉ. बी. आर. अम्बेडकर को नासिक में स्थित हंसराज पी. ठाकरसे
कालेज के अधिकारियों द्वारा जुलाई, 1939 में एक चाय पार्टी में आमंत्रित किया गया।
इस समारोह में डॉ. अम्बेडकर के सामने जो प्रश्न लिखित रूप में प्रस्तुत किए गए
उनके, उत्तर में उन्होंने कहाः-
‘‘सरकार करों के रूप में जो पैसा जुटा रही है उसका प्रयोग
किसानों के ऋण चुकाने, गरीबी के विरुद्ध लड़ने और शिक्षा प्रदान करने के लिए
किया जाना चाहिए; लेकिन यदि मद्यनिषेध को इन तात्कालिक समस्याओं के चलते
प्राथमिकता या वरीयता प्रदान की जाती है तो यह काम नहीं हो सकता। जब उनसे
यह पूछा गया कि क्या वे भारत के विभाजन के प्रसंग में सर सिकंदर हयात खान
द्वारा प्रायोजित क्षेत्रीय स्कीम से सहमत हैं, तो उन्होंने कहा कि वे 7 क्षेत्रों के बात
से सहमत नहीं हैं और उन्हें इस बात का संदेह है कि यह कार्रवाई पाकिस्तान की
स्थापना की दिशा में एक कदम है। जहां तक ब्रिटिश शासन का प्रश्न है, उन्होंने
कहा कि अन्य सभी दोषों अथवा अयोग्यताओं के अलावा उन्होंने भारतीयों को दो
लाभ पहुंचाएं हैं। एक साझा केन्द्रीय सरकार और विभिन्न धर्मों के अनुयायियों के
बीच इस आशय की भावना कि वे एक ही सरकार के अंग हैं।’’ ख्1,
1 कीर, पृष्ठ 324