204 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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‘महार और मांग वतनदारों’ की विभिन्न शिकायतों के निवारण के लिए समूचे बंबई प्रांत में सत्याग्रह आंदोलन और आम हड़ताल की संभावना देखने के लिए डॉ. बी. आर. अम्बेडकर की अध्यक्षता में अहमदनगर [*] में सप्ताहांत में वतनदारों का एक सम्मेलन आयोजित किया गया।
विधानसभा के इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी के लगभग सभी सदस्य उस सम्मेलन में मौजूद थे।
ग्राम अधिकारियों की संस्था के उद्गम का उल्लेख करते हुए डॉ. अम्बेडकर ने कहा-
मराठा शासन के दौरान 12 अलग-अलग अधिकारी होते थे, जैसे पटेल, कुलकर्णी, देसाई, न्हावी (नाई), सुतार (बढ़ई), मुसलमान, आदि जिन्हें विशिष्ट कर्तव्य सौंपे जाते थे और जिनके निष्पादन के लिए उन्हें राजस्वमुक्त भूमि प्रदान की जाती थी।
‘‘अंग्रेजों के आगमन के साथ वतन भूमियों के माध्यम से भुगतान करने की प्रणाली महारों को छोड़कर सभी मामलों में समाप्त कर दी गई थी। उनके स्थान पर नियमित वेतन पाने वाले लोग नियुक्त किए गए थे।
डॉ. अम्बेडकर ने आगे कहा- ‘‘पुरानी प्रणाली की समाप्ति की प्रक्रिया के बारे में दिलचस्प बात यह है कि सैकड़ों मामलों में भूतपूर्व पटेल, कुलकर्णी, तलाती आदि हालांकि अपने औपचारिक ड्यूटी से मुक्त हो गए थे लेकिन उन्हें अपनी जमीनें रखने की अनुमति दी गई और उनकी वतन भूमियों को लेकर मालगुजारी में जो वृद्धि की गई थी वह मात्र नाममात्र की थी। इस प्रकार आज की तारीख में सरकार इन ग्राम अधिकारियों के उत्तराधिकारियों को लाखों रुपए का भुगतान कर रही है जबकि उन्हें किसी भी ग्राम ड्यूटी का निर्वाह नहीं करना होता।
* 23 दिसंबर, 1939 के जनता में प्रकाशित हरे गांव, तालुका कोपरगांव, जिला अहमदनगरमें 16 दिसंबर, 1939 की सम्मेलन - रिपोर्ट