57. 16.12.1939 महार वतन एक हृदयहीन शोषण है। - Page 227

206 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इन तथा अन्य शिकायतों के संबंध में उन्होंने यह प्रस्ताव रखा कि गवर्नर के पास एक प्रतिनिधिमंडल भेजा जाना चाहिए जो उनके सामने सभी तथ्य रखेगा और उनका निवारण प्राप्त करेगा।

इसके बाद काँग्रेस पर चर्चा करते हुए डॉ. अम्बेडकर ने कहा, ‘‘यह एक अच्छी बात है कि काँग्रेस ने इतनी जल्दी अपना असली रूप प्रकट कर दिया है और उसने पूर्ण स्वराज्य प्राप्त करने तक, जबकि स्थिति में सुधार लाना अत्यंत कठिन हो सकता था, इंजजार नहीं किया।

‘‘हम अब इस शिक्षा को भूलने वाले नहीं है। हम काँग्रेस जितन मजबूत नहीं है। हमारी संख्या भी उतनी नहीं है। लेकिन हम सामाजिक जीवन के इस सिद्धांत को मानते हैं कि यदि हमें खाने के लिए सूखी रोटी से अधिक कुछ नहीं प्राप्त होता है, तो हमें उस रोटी को अपने साथियों क साथ बांटकर खाना चाहिए। काँग्रेस सूखी रोटी के फिराक में नहीं है। उस पूरी दावत चाहिए और वह पूरी दावत का आनंद स्वयं लेना चाहती है। वह दूसरों का भूखा रखना चाहती है।’’ उन्होंन कहा, ‘‘यह ठीक है कि हम उनके हाथों स थालियां नहीं छीन सकते। लेकिन हम एक काम तो कर सकते हैं कि एक मुट्ठी धूल भर लें और जब वे दावत खा रहे हों तो उन पर फेंक दें।’’ ख्1,

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  1. दि बांबे क्रानिकल, 19 दिसम्बर, 1939