2 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
सैनिकों ने खाद्य सामग्री की कमी के चलते व बहुत से लोगों व पशुआें में बीमारी फैली होने पर भी पैदल कूच करते हुए मुश्किलें झेलने की अच्छी क्षमता दिखाई थी। चाहे वे कूंच करते या धावा बोलते, घिर जाते या कैदी बना लिए जाते, किलों में बारूद लगाते या व्यवहार कुशलता के तौर पर पीछे हटते हुए वे हमेशा हर स्थिति में अपने अधिकारियों व सहकर्मियों के साथ अडिग रहे। उन्होंने हमेशा अपने रेजिमेंट का सम्मान व गौरव बनाए रखा व कोई ऐसा कार्य नहीं किया जिससे शर्मिंदा होने की गुंजाइश हो। सन् 1818 के नव वर्ष दिवस पर तो महार सैनिकों ने भीमा नदी के किनारे कोरेगांव युद्ध क्षेत्र में लड़ते हुए वह कर दिखाया जिसने उनके सम्मान में चार चांद लगा दिए। 500 सैनिकों का एक छोटा दल जो कि बम्बई देशी पैदल सेना (इंफैंटरी) की पहली रेजिमेंट दूसरी बटालियन से था उनके साथ पूना अनियमित अश्वसेना के 250 सैनिक और मद्रास तोप खाने के 24 गोरे तोपचियों के साथ-साथ तोपें जिनकी क्षमता 6 पौंड गोले दागने की थी कप्तान एफ.एफ. स्टान्टन के नेतृत्व में बिना रुके, बिना विश्राम, बिना भोजन व बिनापानी, बाजीराव पेशवा II की बड़ी फ़ौज, जिसमें 20,000 घुड़ सवार सैनिक व 8000 पैदल सैनिक थे, पुणे और किरकी में ब्रिटिश सेना को घेर रखा था, से लोहा लिया व टक्कर दी।
31 दिसम्बर की शाम को सिरूर से कैप्टन स्टान्टन की सैनिक टुकड़ी को पूना के सेनागढ़ की रक्षा हेतु भेजा गया था। यह सैन्य टुकड़ी 27 मील की दूरी तय करती हुई रात भर पैदल चलकर पहली जनवरी 1818 की सुबह कोरेगांव पहुंची और वहां उसने मशहूर मराठा घुड़सवारों द्वारा घमासान लड़ाई का सामना किया। कप्तान स्टान्टन अपनी सेना को कोई निर्देश दे पाते, उससे पहले ही पेशवा सैनिकों की लगभग 600 सैनिकों की तीन टुकडि़यों ने तीन दिशाओं से आगे बढ़कर उन की सैन्य टुकड़ी को ललकारा। पेशवा सैनिकों के पास दो तोपें थी जो वे आगे बढ़ती तीन टुकडि़यों को प्रोत्साहित कर रही थीं और राकेट से अग्निबाणों की बौछार से स्टान्टन के सैनिकों को आगे बढ़ने से रोक रही थीं। पूना की अनियमित अश्व सेना के वीरतापूर्वक प्रयास के बावजूद पेशवा के मराठा घुड़सवारों और पैदल सेना ने कोरेगांव में पूरी ब्रिटिश सेना का घेरा डाल दिया था और नदी की ओर जाने वाले सारे रास्तों को जाम कर दिया था। चढ़ाई करने वाली फ़ौजों ने अपनी शक्तियों का पूरा उपयोग कर सामने वालों को पीछे धकेलते हुए गांव के बीचों बीच कुछ मजबूत एवं महत्वपूर्ण जगहों पर कब्जा कर लिया था और उनसे कब्जा छुड़ाना लगभग असम्भव था। हर एक घर, झोपड़ी व गली के लिये भीषण हाथापाई चल रही थी और गोरों की सेना की भारी क्षति हो रही थी। परन्तु भारतीय सैनिक, जिनमें बहुत से महार थे, बड़ी दृढ़ता एवं अत्यन्त धैर्य के साथ जमकर लड़ रहे थे। कप्तान स्टान्टन ने अपने सैनिकों से आखिरी आदमी और