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आखिरी गोली तक लड़ते रहने को कहा। महार सैनिकों ने जबरदस्त उत्साह दिखाते हुए अति विशम परिस्थितियों में अत्यन्त बहादुरी से लड़ाई जारी रखी। जब सूर्यास्त हुआ तो गोरों ने अपने आप को बड़ी निराशाजनक हतप्रथम परिस्थिति में पाया। मराठा सेना का नेतृत्व योग्य जनरल गोखले कर रहे थे और गोरों पर सब तरफ से हावी थे। सौभाग्यवश, रात होने के साथ मराठा सैनिकों का हमला थोड़ा ढीला पड़ा और गोरों ने कुछ राहत की सांस ली। तब केवल एक अकथनीय रहस्यमय अवसर ने सारी लड़ाई के घटनाचक्र को ही बदल दिया। इस बार कोई निष्कर्ष निकालना कठिन था कि पेशवा सैनिक जब जीत के इतना नजदीक थे तो उन्होंने रात के नौ बजे गोलियां चलाना क्यों रोक दिया व कोरे गांव से सेना क्यों पीछे हटा ली। मद्रास पैदल सेना के 12, 21वीं रेजिमेंट की बम्बई देशवासी पैदल सेना के पचास सैनिक व तीन ब्रिटिश सैन्य अधिकारी युद्ध में एक सौ तेरह सैनिक और दो ब्रिटिश सैन्य अधिकारी घायल हुए। 21वीं रेजिमेंट की बम्बई देशी पैदल सेना के जो सैनिक शहीद हुए उनमें 22 महार परवरिस थे (नाम के अंत में ‘नाक’ से उनकी पहचान हुई), * उनमें 16 मराठा, 8 राजपूत, 2 मुसलमान और 1 या 2 सम्भवतः भारतीय यहूदी भी थे।
इस वीरतापूर्ण साहस, सहनशक्ति, मानसिक दृढ़ता, अनुशासित निर्भयता दर्शाने वाले सैनिकों के कृत्य ने महार सैनिकों के लिए एक अमर प्रसिद्धि अर्जित करा दी ख्1, । ‘‘दस्तावेजों में लिखित है कि, ‘‘यह कहना कठिन है कि इस सबसे किसकी ख्याति, कीर्ति और गौरव ज्यादा बढ़ा, स्वयं भारतीय सैनिकों का या गोरे अधिकारियों का जो अपने नेतृत्व व स्पष्ट आदेश से एक विश्वास व अडिग आदेश पालन की भावना और आश्चर्यजनक स्वामिभक्ति भारतीय सैनिकों में जगा पाए’’ ख्2, (भारतीय सैनिकों में बहुत से महार थे)।
* महार शहीदों के नामः 1. सोमनाक कमलनाक नायक 2. रामनाक यमनाक नायक 3. गोडनाक कोठे नाक
रामनाक यशनाक 5. भोगनाक हरनाक 6. अम्बानाक कनानाक 7. गननाक बलनाक 8. बलनाक कोंडनाक
रूपनाक लखनाक 10. वापनाक रामनाक 11. वितनाक धमनाक 12. रगनाक गननाक 13. वापनाक
हरनाक 14. रायनाक वाननाक 15. गजनाक धर्मनाक 16. देओनाक आननाक 17. गोपालनाक बालनाक
- हरनाक हिरनाक 19. जेत नाक धै नाक 20. गन नाक लखनाक। महार सैनिक जो हुए घायलः 21.
जननाक हिरनाक 22. भीकनाक रतननाक 23. रतननाक घननाक (संदर्भ- डा. बाबा साहिब अम्बेडकर का 1 अग्रलेख (मराठी) सम्पादक रत्नाकार गणवीर पृष्ठ 247 ‘‘बहिष्कृत भारतीय’’
ब्रिगेडियर-जनरल लॉयनेल स्मिथ की रपट प्रशासक के प्रतिनिधि को पूना में रपट सौंपी रपटा, सेना के
कमांडर-इन-चीफ डक्कन व भारत के गर्वनर जनरल और ईस्ट इंडिया कम्पनी के निदेशकों द्वारा कोर्ट 2 मेजर जे.टी. गोरमैन का एतिहासिक दस्तावेजः द्वितीय बटैलियन चौथी बम्बई हथगोलन्दाज (ग्रेनेडियरज़) के प्रेषित आदेश। 3 1776-1933‘‘कोरेगांव की लड़ाई’’ लै. कर्नल एच.ई. कैन्यों द्वारा यूनाइटिड सर्विसज़ जनरल 1931।