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हिंदू समाज को अपने युगों पुराने ढांचे को भंग करके
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने अछूतों के लिए स्वतंत्रता दिवस के रूप में 19
मार्च की घोषणा की। 1927 की यही वह तारीख थी जबकि महाड में अछूतों की एक
एतिहासिक बैठक हुई थी जहां डॉ. अम्बेडकर ने लोकतंत्र के तीन सिद्धांतों अर्थात
स्वतंत्रता, समानता और मित्रता की घोषणा की थी। उसकी स्मृति में इंडिपेंडेंट लेबर
पार्टीं की तरफ से 19 मार्च को महाड में ‘अछूतों का स्वतंत्रता दिवस’ नामक एक
विशेष समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर एक विशेष हैंडबिल प्रकाशित
किया गया। तदनुसार दलित वर्गों ने 19 मार्च, 1940 को ही अपना स्वतंत्रता दिवस
मान लिया। ख्1,
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने महाड़ में 10000 लोगों की रैली को संबोधित
किया। अपने वक्तव्य में उन्होंने निम्न विचार व्यक्त किएः
‘‘भारतीयों के लिए अपना समूचा ध्यान देश की राजनैतिक स्वतंत्रता के प्रति
केन्द्रित करना और सबसे अधिक महत्वपूर्ण सामाजिक तथा आर्थिक समस्याओं को
भुला देना सर्वथा गलत है। उन्होंने कहा कि समय आ गया है जब हिंदू समाज को
अपनी युगों पुराने ढांचे को भंग करके आधुनिक नीति पर संगठित होना चाहिए।’’
रात के समय महाड नगरपालिका द्वारा डॉ. अम्बेडकर के स्वागत में एक मानपत्र
भी प्रस्तुत किया गया। ख्2,
12 जनता, 23 और 30 मार्च, 1940 कीर, पृष्ठ 231