214 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
दिलचस्पी खत्म कर देते हैं और समुदाय के भाग्य को लेकर पूरी तरह उदासीन हो जाते हैं।
उन्होंने आगे कहा, ‘‘कुछ अन्य ऐसे होते हैं जो अपने सार्वजनिक कार्य में इतने अस्थिर होते हैं कि वे कुछ समय के लिए किसी एक प्रकार के काम में लग जाते हैं, बाद में किसी और काम में तथा उसके बाद तीसरे काम में प्रवृत्त हो जाते हैं, और जिस-जिस संस्थान के साथ वे जुड़े थे उसे बदतर की स्थिति में छोड़ देते हैं।’’ ख्1,
1 दि बांबे क्रानिकल, 29 मार्च,, 1941