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आप यह नहीं समझ पाए हैं कि आपके भीतर कितनी
जबरदस्त शक्ति है
कॉवासजी जहांगीर हाल, बंबई में, बांबे म्यूनिसिपल कामगार यूनियन की
13 जुलाई, 1941 को हुई वार्षिक आम बैठक में अपने अध्यक्षीय भाषण के दौरान
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने शहर में जिस तरह से कुछेक श्रमिक संघों ने व्यवहार किया
था, उसे लेकर कठोर आपत्ति व्यक्त की। इस बैठक में नगरपालिका के स्वास्थ्य, जल
निकासी तथा अन्य सैनीटरी विभागों से 1000 से अधिक पुरुषों और महिलाओं ने भाग
लिया था और उन्हें यह बताया गया था कि वे किस तरह मात्र संगठित एकता के
बल पर, अधिक त्याग दिए बिना भी अपनी मनचाही हर वस्तु प्राप्त कर सकते हैं।
डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि शहर में कुछेक संघों, विशेष रूप से टेक्सटाइल
यूनियनों के नेताओं ने अपने लोगों से पिछले 14 वर्षों के दौरान अनेक हड़तालें
करवाई थीं लेकिन उनमें से कोई भी एक उनकी किसी भी मांग को पूरा कराने में
सफल नहीं हो सका। सच तो यह है कि इन हड़तालों के फलस्वरूप, हड़ताल की
अवधियों के दौरान बेरोजगारी और छंटनी तथा हड़ताल के बाद बर्खास्तगी के चलते
कामगारों के दुख और दुर्दशा और ज्यादा बढ़ गई थी।
इस तरह के क्रियाकलापों के फलस्वरूप कामगारों को संगठित करने की
बजाय उन्हें असंगठित और उनके संघों को विखंडित कर दिया गया था।
दूसरी तरफ म्यूनिसिपल कामगार संघ अधिकारियों के साथ बातचीत द्वारा
अपनी अनेक शिकायतों का निवारण करने में सफल रहा था।
दलित नेता ने कहा, ‘‘लगता है कि आपको इस बात की समझ नहीं है कि
आपके हाथों में कितनी जबरदस्त ताकत है। आप केवल काम करना बंद करके एक
सप्ताह में ऐसी खलबली और विनाश पैदा कर सकते हैं जो हिंदू मुस्लिम दंगे तीन
महीने में नहीं कर सकते। अधिकारी लोग इस बात को जानते हैं और इसलिए वे
आपकी साझा मांगों को किसी अन्य स्थान की बजाय अधिक आसानी से स्वीकार
कर लेंगे। निश्चय ही मैं शहर में इस तरह की खलबली फैलाने की इच्छा नहीं
रखता और मैं इस तरह की स्थिति से बचने के लिए तब तक ऐसे सभी संभव प्रयास
करूंगा जब तक कि अधिकारी हमारी मांगे पूरी न कर लें। मेरा यही कहना है कि