65. 13.7.1941 आप यह नहीं समझ पाए हैं कि आपके भीतर कितनी जबरदस्त शक्ति है, अपनी-अपनी जबर्दस्त शक्ति को नहीं पहचान सके। - Page 237

216 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

आपको संघ के रूप में संगठित हो जाना चाहिए और प्रबंध समिति आपके सक्षम और ओजस्वी नेताओं के साथ जुड़कर यह तथ्य बाकी सारा काम निपटा देगा।

इसके बाद डॉ. अम्बेडकर ने एकता के फलस्वरूप देश के राजनैतिक जीवन में दलित वर्गों द्वारा प्राप्त स्थिति का उल्लेख किया कि यह वर्ग जिसका 10 वर्ष पहले कोई राजनैतिक दर्जा नहीं था उसे आज एकता के कारण कांग्रेस और लीग के समतुल्य दर्जा प्राप्त हो गया है।

अंत में, उन्होंने आम दलित वर्गों से अपने आपको विधानसभा की मतदाता सूची में शामिल कराने को कहा।

इस संबंध में उन्होंने याद दिलाया कि विधानसभा के पिछले चुनावों में जिस निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा था (उत्तर बंबई) उसमें केवल 8000 हरिजन थे जबकि 48000 सवर्ण हिंदू मतदाता थे और उन्होंने प्रायः ऐसा सोच लिया था कि ऐसे निर्वाचन क्षेत्र से खड़े होकर उन्होंने अपनी गर्दन में फांसी का फंदा लगा लिया है। तथापि दलित वर्गों के मतदाता मतदान केन्द्र तक पहुंचे और उसके बाद चुनाव के मामले में जो प्राप्ति हुई वह एक चमत्कार था।

संघ के महासचिव डॉ. डी. वी. प्रधान ने प्रारंभ में वार्षिक रिपोर्ट पढ़कर सुनाई, जिसमें उस वर्ष के दौरान चहुमुखी प्रगति पाई गई।

महंगाई भत्ते में एक रुपए की वृद्धि की मांग और इस भत्ते को ऐसे सभी कामगारों के मामले में लागू करना जिनका वेतन 75 रुपए प्रतिमाह तक था; निगम द्वारा म्यूनिसिपल श्रमिकों की आवासीय और रहन-सहन की स्थितियों पर रिपोर्ट करने के लिए निगम द्वारा गठित समिति से अपनी रिपोर्ट जल्दी प्रस्तुत करने के लिए कहना; तथा संघ के संविधान में कुछेक मामूली परिवर्तन करना - उपर्युक्त आशय के प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए और महासभा ने उन्हें मंजूरी प्रदान की। प्रस्तावों के मामले में बोलने वालों में शामिल थेः सर्वश्री एम. ची. डोंडे, एम. कावली तथा जी. एम. जाधव।

श्री डी. वी. प्रधान के प्रस्ताव पर एक नई प्रबंध समिति का चयन किया गया जिसमें डॉ. अम्बेडकर अध्यक्ष के रूप में और मेसर्स एम. वी. डोंडे और एस. बी. केनी उपाध्यक्ष चुने गए। इसके बाद श्री एम. बी. जाधव सहायक सचिव ने स्पष्ट किया कि किस प्रकार कामगारों के बीच संप्रदायवाद का अनुचित लाभ उठाया जा रहा था और किस प्रकार गुजराती दलित वर्ग के कामगार जैसे भंगी आदि ने अपने आपको संघ से अलग कर लिया था हालांकि उन्हें सभी लाभ जैसे मजदूरी में वृद्धि इत्यादि प्राप्त हो रहे थे, जोकि संघ के क्रियाकलापों के स्वरूप प्राप्त हुए थे।’’ ख्1,

1 दि बांबे क्रानिकल, 15 जुलाई, 1941    