66. 16.8.1941 वतनदारी : महारों के लिए एक अभिशाप। - Page 239

218 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

‘‘मैंने पिछले कई वर्षों से हिंदू समाज और उसकी असंख्य बुराइयों पर कठोर और कटु प्रहार किए हैं लेकिन मैं आपको यह विश्वास दिलाना चाहता हूं कि अंग्रेजों के विरुद्ध मेरा प्रहार हिंदुओं पर किए गए प्रहार की तुलना में 100 गुना अधिक कठोर, अधिक कटु, अधिक घातक होगा यदि मेरे अपने लोगों को उत्पीडि़त करके और उनसे अंतिम सूखी हड्डी छीनकर जिसके सहारे वे अपना निम्नतम जीवन बिता सकते हैं यानी अंग्रेजों के प्रति मेरी निष्ठा का अनुचित लाभ उठाया जाता है।

मैं अंग्रेज शासकों को यह बताना चाहता हूं कि इस प्रांत में उनका शासन हमारी वजह से है, ये महार टुकडि़यां थीं जिन्होंने पेशवा शासन का ध्वंस किया था और इस प्रांत में अंग्रेजी राज्य की स्थापना की थी।

महारों ने अंग्रेजों के लिए महाराष्ट्र पर विजय पाई थी। उन्हें अपनी सेवाओं के लिए क्या मिला? कुछ नहीं।

वतनदारी महारों के लिए एक अभिशाप बन गई है। यह उन्हें अनंत गरीबी के साथ बांधे रखती है। इससे उनका आत्मसम्मान नष्ट हो जाता है। यह उन्हें निचले स्तर का बनाए रखती है।

हमें कुल मिलाकर यह कहना है कि ‘‘हमें आपकी वतनदारी नहीं चाहिए। हमें अपनी सेवा से मुक्त कर दें। हमारी भूमियों पर पूरा भू-राजस्व लगाएं और लोगों को मासिक वेतन के आधार पर लगाएं जैसाकि आपने अन्य ग्रामसेवाओं के लिए किया है।

इन 20 वर्षों के दौरान मेरी यही मांग रही है। इसके बदले में हमें क्या मिलता है? सेवाओं से मुक्ति दिलाए जाने से बहुत अलग, वतनदारों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां डाल दी जाती हैं और उन पर अतिरिक्त ‘जूडी’ लगाया जाता है।

यह एक ऐसी बुराई है जिसे मैं कभी भी सहन नहीं करूंगा। मैं अंग्रेज अधिकारियों को चुनौती देता हूं कि वे जितना बुरा कर सकते हैं, करें।

मैं उन्हें बताता हूं और अंतिम तौर पर बताता हूं कि उन्हें हमसे अतिरिक्त जूडी के रूप में एक पैसा भी नहीं मिलेगा। जो कुछ बुरे से बुरा वो कर सकते हैं, करें।

जहां तक आप वतनदारों का संबंध है मेरे दिशानिर्देश बिल्कुल साफ हैं। आपको अतिरिक्त ड्यूटी के भुगतान का विरोध करना है चाहे उसका परिणाम कुछ भी हो। यदि वे आपके घरेलू सामान या आपके पशुओं की कुर्की कर लेते हैं तो आपको अपने सामान और पशुओं को ले जाने से रोकने के लिए सब कुछ करना चाहिए।