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उन्होंने घोषणा की, ‘‘आपको संविधान सभा का दोबारा सामना करना पड़ सकता है। उस स्थिति में आपका स्थान संविधान सभा के भीतर नहीं होगा। आपको वहां कोई स्थान नहीं मिलेगा। उस समय आपका न्यायसंगत स्थान आपका अपना मुख्यालय होगा, जिसमें आप बमों का निर्माण कर रहे होंगे। जी हां, मेरा मतलब बमों से है। इसके संबंध में कोई भ्रांति नहीं होनी चाहिए। हम लोग कई अन्य लोगों की तुलना में हैंडग्रेनेड को अच्छी तरह संभाल सकते हैं।
कांग्रेस जिसके विरुद्ध वे 20 वर्ष से लड़ रहे हैं उसके लिए उन्होंने एक अच्छी पेशकश की, ‘‘आप स्वराज के लिए लड़ रहे हैं। मैं आपके साथ लड़ने को तैयार हूं। और मैं आपको यह विश्वास दिलाता हूं कि मैं आपसे बेहतर लड़ाई लड़ सकता हूं। मेरी केवल एक शर्त है। मुझे बताएं स्वराज में मेरे को क्या हिस्सा मिलेगा। यदि आप मुझे यह नहीं बताना चाहते और मेरी पीठ पीछे अंग्रेजों के साथ मेल-मिलाप करते हैं तो मुझे आप दोनों की कोई परवाह नहीं है।
उपस्थित श्रोताओं के साथ डॉ. अम्बेडकर ने वैसे ही बात की जैसे कोई पिता अपने बच्चों के साथ करता है। उन्होंने पिछले 23 वर्षों की अवधि से जुड़ी हुई कहानियों और घटनाओं का उल्लेख किया। वह अतीत का स्मरण करने की मनःस्थिति में थे, कोल्हापुर में उन्होंने जिस पहली सार्वजनिक बैठक को संबोधित किया था उसके घटनाक्रम का उल्लेख किया, जहां उन्हें स्वयं अपने लोगों से, जो घृणित परिपाटियों को मूल्यवान विरासत, उत्पीड़न को जन्मसिद्ध अधिकार मानते थे, का विरोध सहना पड़ा था।
और जैसे-जैसे डॉ. अम्बेडकर ने इन परिपाटियों के ब्यौरों का वर्णन किया तो मंच के निकट बैठी हुई रुचिपूर्ण परिधानों से सुसज्जित युवतियां अपनी झुर्रियों भरी बड़ी उम्र की माताओं पर हंसने लगी। और माताएं उन बातों को याद करके शर्मसार होने लगीं जिन्हें उन्होंने इतने लंबे वर्षों तक व्यवहार में लिया था और जिन्हें अब इतनी अनिच्छा से त्यागना पड़ा था। उन्होंने कहा-
‘‘आज आप उन सभी बुराइयों से मुक्त हो चुके हैं। प्रातःकाल की सफेद बर्फ की तरह से आप अब अंधविश्वासों में लिप्त उच्च जातियों के पुरुषों और महिलाओं के समक्ष उपस्थित हैंः जो जाति के मराठा और भंडारी हैं सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से आपसे मीलों पिछड़े हुए हैं।
‘‘जब मैंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरूआत की और उसके बहुत देर बाद तक मैं ऐसा सोचता था कि अच्छा हो अथवा बुरा हम हिंदू समाज के एक अंग हैं।