228 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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2 जुलाई, 1942 को जारी राजकीय घोषणा के अनुसार डॉ. बी. आर. अम्बेडकर को भारत के वायसराय की कार्यकारी परिषद में शामिल किया गया।
‘‘डॉ. बी. आर. अम्बेडकर राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की एक बैठक में उपस्थिति होने के लिए 5 जुलाई, 1942 को तत्काल दिल्ली चले गए और 11 जुलाई को बंबई वापस लौटे।
लौटने पर डॉ. अम्बेडकर ने अपने मित्रों और प्रशंसकों द्वारा रेडियो क्लब, बंबई में दिए गए एक रात्रि भोज में भाग लिया। इस अवसर पर बोलते हुए आचार्य एम. वी. डोंडे ने बीते हुए उन धैर्य भरे वर्षों का जिक्र किया जिसमें वे उनके साथ रहे थे, और आशा की हमारा यह नेता अपने लोगों की दासता को समाप्त करेगा और भारत के श्रमिक वर्गों की स्थितियों में सुधार लाने में सफल होगा।
उत्तर में डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने कहा कि, ‘‘उनका जन्म गरीबों में हुआ था, उनका पालन-पोषण उन्हीं के बीच हुआ था वे उन्हीं के बीच रहे थे, भीगे फर्श पर चिथड़ों में वे उन्हीं की तरह सोए थे और अपने लोगों के दुख को बांटा था। उन्होंने अपने मित्रों और शेष विश्व से यह वादा किया कि वे अपने दृष्टिकोण को पूर्णतः अपरिवर्तित रखेंगे और आगे कहा कि नई दिल्ली में उनके घर के दरवाजे उनके मित्रों के लिए हमेशा खुले रहेंगे।’’ ख्1,
1 कीर, पृष्ठ 347-349