229
| l | e | kt |
|---|
| d | s |
|---|
| fu | Eu | re |
|---|
| o | x | k |
|---|
| d | s |
|---|
| l | Hk |
|---|
| lg | k;r |
|---|
72
समाज के निम्नतम वर्ग का संघर्ष कामगार वर्गों के सभी
‘‘12 जुलाई, 1942 को इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी और बंबई म्यूनिसिपल कामगार यूनियन ने अपने नेता डॉ. बी. आर. अंबेडकर को बधाई देने के लिए एक सभा का आयोजन किया।
वहाँ उन्होंने श्रमिकों को बताया कि हालांकि कार्यपालिका का मुख्य कार्य देश की सुरक्षा करना है, तथापि वे क्या पूर्ण कर सकेंगे यह पूरी तरह से परिषद में उनके मित्रों पर निर्भर करेगा।
कोंकण जिले और राज्यों के किसानों द्वारा आर. एम. भट्ट हाई स्कूल, बंबई में आयोजित एक अन्य बैठक में डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने यह घोषणा की कि वे इस लड़ाई में कभी भी आत्मसमर्पण नहीं करेंगे, वे भारत के कामगार वर्गों के हितों की रक्षा करने और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए लड़ते रहेंगे। लेकिन उन्होंने कहा कि वे प्रत्येक छोटे से छोटे मतभेद के मुद्दे पर अपने त्यागपत्र से मंत्रिमंडल के अपने साथियों को धमकी नहीं देंगे।
अपने ऊपर लगाए गए एक आरोप, कि दलित वर्गों के लिए एक पृथक संगठन सामान्य रूप से श्रमिक वर्ग की हितों और एकता के लिए पूर्वग्रह भरा होगा, का उत्तर देते हुए उन्होंने टिप्पणी की कि समाज के निम्नतम स्तर के लिए किया जाने वाला संघर्ष श्रमिक वर्ग के सभी उपवर्ग की बेहतरी में सहायता करेगा क्योंकि जब किसी संरचना की नींव का सबसे निचला पत्थर हिलाया जाता है तो, जो ऊपर की स्थितियों में होते हैं उनका हिलना अवश्यंभावी होता है। उन्होंने उल्लेख किया कि हिंदू जाति के श्रमिकों ने दलित वर्गों के श्रमिकों के विरुद्ध अपने पूर्वग्रह को समाप्त नहीं किया है।
समारोह की अध्यक्षता करने वाले अनंतराव चित्रे ने डॉ. अम्बेडकर से अपने प्रभाव और श्रमिक आंदोलन के क्रियाकलाप के क्षेत्र को बढ़ाने का आग्रह किया ताकि गैर दलित वर्ग के श्रमिक वर्गों को भी शामिल किया जा सके और भारत के समस्त मेहनतकश लोगों को उनका नेतृत्व मिल सके। ख्1,
1 कीर, पृष्ठ 349