73. 15.7.1942 जब नींव का सबसे निचला पत्थर हटाया जाता है, तो ऊपर वाले भी हिलने लगते हैं। - Page 251

230 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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जब नींव का सबसे निचला पत्थर हटाया जाता है, तो

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डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने पिछली रात [*] को भट्ट हाई स्कूल, बंबई में रत्नागिरी और कोलाबा जिलों के किसानों और दलित वर्ग के सदस्यां द्वारा आयोजित बैठक में दिए गए बधाई संबंधी भाषणों के उत्तर में कहा,

‘‘मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि मैं इस लड़ाई में आत्मसमर्पण नहीं करूंगा, मैं कार्यपालिका परिषद में भारत के कामगार वर्ग के हितों की रक्षा करने और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए लड़ता रहूंगा। आप इस संबंध में मुझ पर निर्भर हो सकते हैं। मैं यह भी स्पष्ट करना चाहता हूं कि मैं अपनी जेब में अपना त्यागपत्र तैयार रखने और प्रत्येक छोटे से छोटे मतभेद के बिंदु पर अपने सहयोगियों के चेहरों पर इसे लहराने जैसा बचपना भी नहीं करूंगा।’’

डॉ. अम्बेडकर ने आगे कहा, ‘‘मैं इस बात को लेकर उत्सुक हूं कि दलित वर्ग आंदोलन को अन्य समुदायों के कामगार वर्गों के साथ एक साझा मोर्चा बनाना चाहिए।

‘‘इसी उद्देश्य के साथ मैं पूरे दस वर्ष तक गैर-ब्राह्मण दल से चिपका रहा। इस आशा में कि कभी न कभी यह महान गैर ब्राह्मण समुदाय के मेहनतकश लोगों की स्वतंत्रता का संघर्ष अपने महान अभियान में पूर्ण ऊंचाई तक पहुंचेगा।

पार्टी में लोकतंत्र के महान सिद्धांत के बीज हैं। दुर्भाग्य से इसके नेताओं ने अपने कर्तव्यों और दायित्वों के महत्व को नहीं समझा और सरकार और कांग्रेस के संरक्षण के दोहरे प्रभाव के अंतर्गत इसको टुकड़ों में टूट जाने दिया।

अगर वे अभी भी इस मामले में कुछ करते हैं तो मैं उनका स्वागत करूंगा। मैं बिल्कुल इस बात का आग्रह नहीं करूंगा कि गैर ब्राह्मण श्रमिक व्यक्ति हमारी

* दिनांक 16 जुलाई, 1942 के बी.एस.ए. और 21 जुलाई, 1942 के बांबे क्रानिकल के अनुसार यह बैठक 15 जुलाई, 1942 को आयोजित की गई थी। बांबे सेटिनल की ‘14’ जुलाई स्रोत सामग्री में गलती से पुनः मुद्रित हो गई - संपादक।