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यदि लोकतंत्र समाप्त होता है तो यह हमारा विनाश होगा
अखिल भारतीय दलित वर्ग सम्मेलन के तीसरे सत्र में निर्वाचित अध्यक्ष, राव
बहादुर एन. शिवराज, एमएलए केन्द्रीय धारा सभा और डॉ. बी. आर. अम्बेडकर 18
जुलाई, 1942 को प्रातः 9 बजे नागपुर पहुंचे। रेलवे स्टेशन पर उनका स्वागत, समिति
के अध्यक्ष और सदस्यों द्वारा स्वागत किया गया। स्वागत समिति के लगभग सभी
सदस्य और प्रतिनिधि भी प्लेटफार्म पर मौजूद थे और उन्होंने ‘‘अंबेडकर जिंदाबाद’’
के नारों के बीच निर्वाचित अध्यक्ष और डॉ. बी. आर. अम्बेडकर का हार्दिक स्वागत
किया। निर्वाचित अध्यक्ष और डॉ. अंबेडकर को मालाओं से लाद दिया गया। इसके
पश्चात एक जुलूस की शक्ल में माननीय अतिथियों को रेलवे स्टेशन के सामने लान
में ले जाया गया जहां 50000 से अधिक लोग डॉ. अम्बेडकर और निर्वाचित अध्यक्ष
की झलक पाने के लिए एकत्र हुए थे। लान पर उनके पहुंचते ही उनका स्वागत हर्ष
और ‘‘अम्बेडकर की जय’’ के कान फाड़ देने वाले नारों के साथ किया गया। लान
के साथ प्रांतीय समता सैनिक दल के 5000 वर्दीधारी सैनिकों द्वारा गार्ड आफ आनर
दिया गया। सैनिक दल के बैंड ने उपयुक्त धुनें बजाईं। गार्ड आफ आनर का निरीक्षण
करने के पश्चात निर्वाचित अध्यक्ष और डॉ. बी. आर. अंबेडकर को एक जुलूस के रूप
में कांफ्रेंस पंडाल ले जाया गया, जिनके पीछे समता सैनिक दल का एक मील लंबा
दल चल रहा था जो अपने बैंड लिए हुए था और उनके पीछे सम्मेलन के लिए आए
आगंतुक और प्रतिनिधि हजारों की संख्या में चल रहे थे। इस जुलूस को नागपुर की
जनता बहुत दिनों तक याद रखेगी, क्योंकि ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया था।
मार्ग में विजय के प्रतीक तोरण खड़े किए गए थे और उनके नाम ‘‘अम्बेडकर
गेट’’, ‘‘हरदास गेट’’, ‘‘कल्लू अहीरे गेट’’, ‘‘रमाबाई अम्बेडकर गेट’’ इत्यादि रखे गए
थे। मोहन पार्क होटल जहां निर्वाचित अध्यक्ष और डॉ. अम्बेडकर को अन्य प्रतिनिधियों
के साथ ठहराया गया था, के सामने सैनिकों ने सड़क के दोनों ओर पंक्तियां बनाईं
और लाठियों का आर्क बना दिया जिसके नीचे से माननीय नेता गुजरे। नागपुर में
18 जुलाई से 20 जुलाई, 1942 तक तीन सम्मेलन आयोजित हुए वे थे :-
(1) अखिल भारतीय दलित वर्ग सम्मेलन, जिसकी अध्यक्षता राव बहादुर
एन. शिवराज, बी.ए., बी.एल., एमएलए (केन्द्र) ने की;