74. 18/19.7.1942 यदि लोकतंत्र समाप्त होता है, तो यह हमारा विनाश होगा। - Page 260

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और केवल साझी कार्यवाहियां ही हमको आसन्न राजनीतिक विनाश से बचा सकती थींं। यह सम्मेलन संपूर्ण भारत की अनुसूचित जातियों द्वारा उनके प्रतिनिधियों, जोकि दिल्ली में मिले थे, के माध्यम से व्यक्त की गई इच्छा का परिणाम है और इसीलिए इसको समस्त भारत के अनुसूचित वर्गों का समर्थन प्राप्त है। यही कारण है कि यहां पर हमारे बीच पूरे भारत की अनुसूचित जातियों के प्रतिनिधि उपस्थित हैं। यह सम्मेलन कहां आयोजित किया जाए इस बात को लेकर विभिन्न प्रांतों में बहुत प्रतिद्वंद्विता थी। बंगाल, पंजाब, यूपी, सीपी और बंबई सब इस सम्मेलन को आयोजित करने का श्रेय लेना चाहते थे। अंत में सभी इस सम्मेलन के आयोजन का श्रेय मध्य प्रांत को देने के लिए सहमत हो गए हैं। तथापि, वे सब एक शर्त पर अड़े रहे अर्थात मैं इस सम्मेलन की अध्यक्षता करूं फिर यह चाहे जहां आयोजित किया जाए। सबकी इच्छाओं का सम्मान करते हुए मैंने अध्यक्षता करने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। यह सम्मेलन उसी योजना के अनुसार आयोजित किया जा रहा है। मैं इस बात के प्रति आश्वस्त हूं कि हमने इतना बड़ा और इतना सफल सम्मेलन पहले कभी नहीं किया, और मैं यह भी विश्वास दिलाता हूं कि हम सभी केन्द्रीय प्रांत के अपने मित्रों के कृतज्ञ हैं। यह उन्हीं का उत्साह है, यह उन्हीं का प्रयास है जिसने कि इस सम्मेलन को सफल बनाया है। मूल योजना से केवल एक परिवर्तन यहां पर हुआ है जो अध्यक्षता में परिवर्तन है। मेरे स्थान पर हमारे मित्र राव बहादुर एन. शिवराज इस सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे हैं। जिस समय मैंने अध्यक्षता करने के लिए अपनी सहमति दी थी मैं एक राजनीतिज्ञ की स्वतंत्रता सहित एक स्वतंत्र व्यक्ति था और इस सम्मेलन की अध्यक्षता कर सकता था और अपने विचार व्यक्त कर सकता था। उस समय पद की सीमाएं नहीं थीं। लेकिन इसके पहले सम्मेलन का आयोजन हो सकता एक घोषणा हुई और मुझको वायसराय की कार्यकारी परिषद का एक सदस्य नियुक्त किया गया। इससे मुझ पर पद की सीमाएं आ गईं और मैंने सोचा कि ऐसे दूसरे व्यक्ति को चुना जाना बेहतर होगा जोकि स्वतंत्रता और प्राधिकार के साथ अनुसूचित जातियों के लिए बोल सके। राव बहादुर एन. शिवराज स्वतंत्रता के साथ बोल सकते हैं, और मुझे कोई संदेह नहीं है कि वे प्राधिकार के साथ बोल सकते हैं। वे हमारे लोगों के लिए बहुत समय से मेहनत कर रहे हैं। केन्द्रीय विधायिका में वे हमारे लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं। शिक्षा के दष्ष्टिकोण से बहुत कम लोग ऐसे हैं जो उनके समान योग्य हैं। वे मद्रास विश्वविद्यालय से बी.ए., बी.एल. हैं। वे एक सक्रिय वकील हैं और दस वर्ष से भी अधिक समय तक मद्रास में विधि विषय के प्रोफेसर रहे हैं। वास्तव में इस सम्मेलन की अध्यक्षता करने के लिए उनसे बेहतर व्यक्ति चुना नहीं जा सकता था, और मैं वास्तव में बहुत प्रसन्न हूं कि उन्हें मेरा स्थान लेने के लिए चुना गया है।