74. 18/19.7.1942 यदि लोकतंत्र समाप्त होता है, तो यह हमारा विनाश होगा। - Page 261

240 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इन दिनां मैं भारत सरकार का एक सदस्य हूं ऐसे में आपको हमारे आंदोलन को चलाने और इसे प्रभावी बनाने का उत्तरदायित्व निभाना पड़ेगा, ताकि यह उन परिणामों को प्राप्त कर सके जिन्हें प्राप्त करने की हम सबको आशा है। मैं आपकी सहायता करूंगा, मैं आपको सलाह दूंगा लेकिन मैं इसमें भाग नहीं ले सकूंगा, इस तथ्य को आप सभी को दिमाग में रखना होगा। इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि जिम्मेदारी को दूसरों को सौंपने से पहले मैं अपने उस लेखे-जोखे को प्रस्तुत करूं जो मैंने अछूतों के इस आंदोलन के नेतृत्व के रूप में किया है और जो पिछले 20 वर्ष के दौरान मुझसे जुड़ा रहा है और मेरे तत्वावधान में नहीं तो मेरे मार्गदर्शन में चलता रहा है। मेरे लिए ऐसा करना इस वजह से आवश्यक है कि जिसके ऊपर यह उत्तरदायित्व आएगा उसे यह जानना चाहिए कि इस देश के अन्य समुदायों की तुलना में अनुसूचित जातियों की स्थिति क्या है, उनकी स्वतंत्रता के लिए क्या किया गया है और क्या किया जाना शेष है।

यह बहुत संतोष की बात है कि अछूतों ने सभी दिशाओं में बहुत प्रगति की है। मैं उनमें से केवल तीन बातों का विशेष उल्लेख करना चाहूंगा। उन्होंने राजनीतिक जारूगकता प्राप्त कर ली है जिसे भारत में कुछ समुदाय ही प्राप्त कर पाए हैं। दूसरे, उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। तीसरे, वे देश के संस्थानों और लोक सेवाओं में स्थान प्राप्त कर रहे हैं।

अछूतों की आधुनिक पीढ़ी उनके द्वारा की गई प्रगति की महत्ता का अनुभव करने की स्थिति में नहीं है। सीधी सी बात है वे यह नहीं जानते हैं कि जब 20 वर्ष पहले यह आंदोलन प्रारंभ हुआ था तो स्थितियां क्या थीं। मुझे अच्छी तरह से याद है जब मैं इंग्लैंड से बैरिस्टर-एट-ला के रूप में लौटा था और बंबई में पहली बैठक में भाषण दिया था। बैठक के आयोजकों के अतिरिक्त वहां श्रोताओं में कोई भी सदस्य नहीं था-कुछ व्यक्ति दरवाजों पर बैठे बीड़ी सिगरेट पी रहे थे और कुछ अन्य कोनों में आपस में बातें कर रहे थे। किसी को भी इस बैठक में उपस्थित होने का विचार नहीं आया। अब अंतर को देखिए। यहां पर आज करीब 75000 श्रोता हैं। 20 वर्ष पहले की स्थिति की तुलना में शिक्षा ने अच्छी प्रगति की है। केवल पूना में 50 लड़के कालेजों में पढ़ रहे हैं। कुल मिलाकर लगभग 500 अछूत ऐसे हैं जिन्होंने विभिन्न विश्वविद्यालयों से स्नातक पाठ्यक्रम पूरा किया है। कुछ डाक्टर हैं। कुछ बैरिस्टर बन गए हैं। हमारे भाइयों में से अनेक नगरपालिकाओं जिला और स्थानीय बोर्डों के सदस्य हैं। वर्षों पहले हमारे बच्चों को शिक्षा नहीं दी जाती थी। वर्षों पहले प्रदूषण का कारण समझकर अछूतों को स्थानीय बोर्डों और नगरपालिकाओं का सदस्य बनने की अनुमति नहीं थी। अब यह सब बदल चुका है। लोक सेवा में हमारी प्रगति इतनी