74. 18/19.7.1942 यदि लोकतंत्र समाप्त होता है, तो यह हमारा विनाश होगा। - Page 262

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त्वरित नहीं रही है जैसाकि हम चाहते हैं। कुछ जगहों पर अछूत अपना स्थान बना चुके हैं। मैं यहां पर पुलिस और सेना का उल्लेख करना चाहूंगा। पुलिस विभाग उनके लिए बंद था और किसी कांस्टेबल का पद भी अछूतों के लिए खाली नहीं था। कम से कम कुछ प्रांतों में यह स्थिति बदल चुकी है। अब हमारे लोगों को पुलिस सेवा में भर्ती किया जाता है। मैं सेना का भी उल्लेख करना चाहूंगा। वर्ष 1892 तक महार सेना में हर जगह थे और महारों की सेनाएं थीं। 1892 के पश्चात सेना में महारों की भर्ती रोक दी गई। वर्ष 1914 के महायुद्ध के दौरान सेना में महारों की भर्ती पुनः शुरू की गई और महारों की एक बटालियन बनाई गई। पिछले युद्ध के पश्चात यह बटालियन पुनः भंग कर दी गई। तथापि अब हमारी रेजीमेंट फिर से बनाई जा रही है। हमारे युवकों को कमीशन प्राप्त हो रहा है और हमारे 5 अथवा 6 युवकों ने किंग्स कमीशन प्राप्त किया है और वे सेना में जिम्मेदारी और सम्मान के पदों पर हैं। सबसे अधिक प्रगति हमारी महिलाओं के बीच हुई है। यहां पर आप देख सकते हैं 20000 से 25000 महिलाएं इस सम्मेलन में उपस्थित हैं। उनकी वेशभूषा को देखें, उनके तरीकों को देखें, उनके बोलने के ढंग को देखें। क्या कोई यह कह सकता है कि वे अछूत महिलाएं हैं। हमारी महिलाओं द्वारा की गई प्रगति सबसे अधिक आश्चर्यजनक और हमारे आंदोलन को उत्साहित करने वाली विशेषता है और यह निश्चित तौर पर हमारी सर्वाधिक भावाविभूत कर देने वाली विशेषता है।

यह प्रगति का ऐसा लेखाजोखा है जिस पर हम सभी को गर्व हो सकता है। यह एक ऐसी प्रगति है जिसके लिए हमें किसी को धन्यवाद नहीं देना है। यह हिंदुओं की दया का परिणाम नहीं है। यह एक ऐसी उपलब्धि है जोकि पूर्णतः हमारी अपनी मेहनत का परिणाम है। प्रश्न यह है कि हम इस प्रगति को कैसे बनाए रखें। ये एक ऐसा प्रश्न है जिसे हमें कभी भी अपने आपसे पूछना नहीं भूलना चाहिए। समुदायों की प्रतिस्पर्धा में प्रगति शक्ति का परिणाम होती है। यह शक्ति आर्थिक हो सकती है, सामाजिक हो सकती है अथवा राजनीतिक हो सकती है। क्या हमने अपनी प्रगति को बनाए रखने की शक्ति है? क्या हममें आर्थिक शक्ति है? मुझे पूरा विश्वास है कि हममें नहीं है। हम दलितों का एक वर्ग हैं। क्या हमारे पास सामाजिक शक्ति है? मैं आश्वस्त हूं कि हमारे पास नहीं है। हम मानवता का विकृत भाग हैं। इसलिए एकमात्र वस्तु जिस पर हम अपनी निरंतर प्रगति के लिए निर्भर रह सकते हैं वह हैं राजनीतिक शक्ति प्राप्त करना। मुझे इस बात में कोई संदेह नहीं है कि हमारे उद्ध ार का एकमात्र रास्ता यही है और यह कि इसके बिना हम समाप्त हो जाएंगे। यही वह प्रश्न है जिस पर हम सबको सारा ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। यह हमारे लिए जीवन और मृत्यु का प्रश्न है। राजनीतिक शक्ति प्राप्त करने के मामले में हमारी