74. 18/19.7.1942 यदि लोकतंत्र समाप्त होता है, तो यह हमारा विनाश होगा। - Page 266

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लीग ने अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के हितों पर ध्यान देना प्रारंभ किया और उनके दावों की सहायता के लिए शपथ भरे संकल्प पारित किए और वह न केवल मुसलमान हितों की वकालत करने वाले के रूप में सामने आई बल्कि वह भारत की अन्य सभी अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की विजेता रूप में सामने आई। लीग का यह दृष्टिकोण निःसंदेह अछूतों के लिए बहुत बड़ी सहायता था क्योंकि अछूतों का दृष्टिकोण हमेशा से भारत के मुसलमानों के साथ रहा। लेकिन लीग का दृष्टिकोण पूरी तरह से बदल चुका है। पाकिस्तान संबंधी संकल्प के पारित हो जाने के बाद से मुस्लिम लीग ने मुसलमानों को एक समुदाय मानना बंद कर दिया है। यह मानती है कि मुसलमान एक राष्ट्र हैं। यही सब कुछ नहीं बल्कि मुस्लिम लीग यह भी विश्वास करती है कि उसे अन्य समुदायों से कुछ लेना-देना नहीं है, और यह कि उसे न केवल हिंदू समुदाय, बल्कि किसी अन्य अल्पसंख्यक समुदाय से भी लेना-देना नहीं है। मुस्लिम लीग का संयोजन साधारण सा है। यह बिना किसी विशेषता अथवा विभेद के मुसलमानों का एक संयोजन है, जोकि अन्य सभी गैर-मुसलमानों के विरुद्ध है। लीग के दृष्टिकोण में इस परिवर्तन से अछूतों पर बहुत गंभीर प्रभाव पड़े हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि उन्होंने एक साथी खो दिया। लेकिन इसका अर्थ एक साथी को खोने से कहीं और अधिक हो सकता है। मुस्लिम लीग ने न केवल गैर-मुसलमानों के विरुद्ध मुसलमानों का एक नया और भिन्न प्रकार का संयोजन स्थापित किया है, बल्कि इसने मूल्यों का एक नया समीकरण भी स्थापित किया है। यह समीकरण एक सीधा सा समीकरण है। ये कहता है कि मुसलमान उनकी संख्या चाहे कुछ भी हो वे गैर-मुसलमानों के समान है और इसलिए किसी भी राजनीतिक व्यवस्था में मुसलमानों को 50 प्रतिशत की हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। इस समीकरण को कोई भी सहमति नहीं दे सकता। यह न केवल अंकगणित के विरुद्ध है; यह अछूतों सहित अन्य सभी गैर-मुसलमानों के हितों के विरुद्ध है। मुस्लिम लीग के इस राजनैतिक दृष्टिकोण के इन परिवर्तनों के संदर्भ में यह कहा जा सकता है कि अछूतों ने न केवल एक साथी खो दिया है, बल्कि उन्होंने एक दोस्त भी खो दिया है, क्यांकि यदि लीग सभी बातों में 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व की मांग पर अड़ी रहती है तो इस बात में कोई संदेह नहींं है कि मुसलमान और अछूत आमने-सामने आ जाएंगे।

अभी तक मैंने आपको यह बताया है कि भारतीय राजनीति में हमारी क्या स्थिति थी और कौन सी शक्तियां हमें हमारी इस स्थिति को नीचे कर रही हैं। अब मैं आपको वह बात बताता हूं जोकि मेरे अनुसार आपकी राजनीतिक मांगें होनी चाहिए। यह बहुत आवश्यक है कि आप उनको स्पष्ट शब्दों में तैयार करें। इससे हमारी स्थिति स्पष्ट होगी। हमारे लोग जानेंगे कि हम क्या चाहते हैं। हमारे विरोधियों को हमारी मांगों का पता चलेगा।