74. 18/19.7.1942 यदि लोकतंत्र समाप्त होता है, तो यह हमारा विनाश होगा। - Page 267

246 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

सर्वप्रथम आपको इस बात पर जोर देना चाहिए कि आपको भारत के राष्ट्रीय जीवन में एक स्वतंत्र और पष्थक तत्व के रूप में पहचाना जाए। यह सिद्धांत, कि वे केवल हिंदुओं का एक उप-वर्ग हैं, से पूरी शक्ति के साथ लड़ा जाना चाहिए। अछूतों को हिंदुओं से अलग एक अलग तत्व के रूप में पहचान दिलाने में असफलता उनको दलित ही रखेगी जिससे उनका दमन और ह्रास होगा। अगली मांग के रूप में आप यह प्रस्ताव सामने रखें कि अछूतों की शिक्षा के लिए प्रत्येक प्रांत के बजट में वार्षिक रूप से एक राशि अलग रखी जाए, इस बात का संविधान में प्रावधान किया जाए। आप न केवल प्राथमिक शिक्षा बल्कि उच्च शिक्षा के लिए भी ऐसी राशि की मांग कर सकते हैं। इस अवस्था में हमारे लिए प्राथमिक शिक्षा की तुलना में उच्च शिक्षा अधिक महत्वपूर्ण है। नेतृत्व के दृष्टिकोण से उच्च प्रशासनिक पदों को बनाने संबंधी दृष्टिकोण से अछूतों को उच्च शिक्षा दिया जाना एक बहुत बड़ी आवश्यकता है। तीसरे, आपको यह मांग करनी चाहिए कि लोक सेवाओं में पदों की एक निश्चित संख्या अछूत प्रजा के लिए न्यूनतम योग्यता के नियम के आधार पर आरक्षित की जाएं। यह बहुत आवश्यक है। हमें दुख गलत प्रशासन के कारण उठाने पड़ते हैं न कि गलत कानूनों के कारण। प्रशासन खराब है क्योंकि यह हिंदू जाति के हाथों में है जो अपने सामाजिक पूर्वग्रहों को प्रशासन में ले आते हैं और अछूतों को किसी न किसी कारण से लगातार समान लाभ के सिद्धांत के आधार पर लाभ देने से मना करते हैं जोकि उनकी हकदारी है। अच्छे कानूनों से भी तब तक कुछ नहीं हो सकता है जब तक कि प्रशासन भी अच्छा न हो और आपको अच्छा प्रशासन तभी मिलेगा जब अछूतों से संबंधित व्यक्ति उसमें होंगे और उच्च प्रशासनिक पदों को संभालेंगे जहां से वे इस बात की निगरानी कर सकेंगे कि किस प्रकार अन्य हिंदू सिविल सेवक अछूतों से व्यवहार कर रहे हैं और वे उन्हें रोक सकेंगे, नियंत्रित कर सकेंगे और गलत कार्य करने से बाधित कर सकेंगे। तथापि,

खाली आरक्षण मांगना ही पर्याप्त नहीं है। यह आग्रह करना आवश्यक है कि इस प्रकार का आरक्षण एक निर्धारित समय के भीतर लागू किया जाए। यह आरक्षण से कहीं ज्यादा आवश्यक है, क्योंकि जब तक आप कोई अवधि निर्धारित नहीं करते हैं, आरक्षण नहीं आएगा। इसे किसी न किसी आधार और सामान्य लेकिन अंतहीन आधार कि कोई उपयुक्त उम्मीदवार नहीं मिला, के आधार पर बचने की कोशिश की जाएगी। हम सभी जानते हैं कि यदि कोई हिंदू, नियुक्ति प्राधिकारी है तो उसे अछूतों में से कोई भी उम्मीदवार उपयुक्त नहीं मिलेगा। चौथे, आपको केन्द्रीय और प्रांतीय कार्यपालिकाओं में अछूतों के लिए प्रतिनिधित्व प्राप्त करने पर आग्रह करना चाहिए। ये मुख्य स्थितियां हैं। इन स्थितियों पर रहने वालों के पास वह शक्ति होती है जो घटनाओं के क्रम को निर्देशित कर सके। केवल वे ही ऐसी किसी गड़बड़ी,