74. 18/19.7.1942 यदि लोकतंत्र समाप्त होता है, तो यह हमारा विनाश होगा। - Page 274

253

हिंदुओं की तुलना में कम संख्या में गांव के बाहर रहती रहेंगी तब तक वे अस्पृश्य रहेंगी तथा स्वतंत्र और पूर्ण जीवन का आनंद न उठा सकेंगी। अनुसूचित जातियों को हिंदू जाति की निरंकुशता और दमन से बचाने, उन्हें उनका पूर्ण पुरुषत्व विकसित करने में सक्षम बनाने, उन्हें आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा देने के साथ-साथ अस्पृश्यता के उन्मूलन का मार्ग प्रशस्त करने के लिए लंबे और तर्कसंगत विचार-विमर्श करने के पश्चात यह सम्मेलन इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि भारत में इस समय विद्यमान ग्राम प्रणाली, जो ऐसी सभी बुराइयों का मूल है जिनके चलते अनुसूचित जातियां कई शताब्दियों से हिंदुओं के हाथों शोषित हो रही हैं, में आमूल परिवर्तन किया जाना चाहिए। इन परिवर्तनों की आवश्यकता को महसूस करते हुए इस सम्मेलन का यह मानना है कि सरकार की प्रणाली में संवैधानिक परिवर्तनों के साथ-साथ इस समय विद्यमान ग्राम प्रणाली में नीचे दिए गए परिवर्तन किए जाने चाहिएः पृथक गांव

(1) संविधान में अनुसूचित जातियों को उनके वर्तमान निवास स्थान से

स्थानांतरित करके पष्थक अनुसूचित जाति गांव स्थापित किए जाने की

व्यवस्था होनी चाहिए जो हिंदू गांवों से दूर और स्वतंत्र हों। अधिवास आयोग

(2) नए गांवों में अनुसूचित जातियों के आवास के लिए संविधान में अधिवास

आयोग की स्थापना के लिए व्यवस्था की जानी चाहिए। अनुसूचित जातियों के लिए भूमि

(3) ऐसी सभी सरकारी भूमि, जो कृषियोग्य है और किसी के कब्जे में नहीं

है, अनुसूचित जातियों की नई बस्तियां बसाने के लिए इस प्रयोजन के

लिए गठित आयोग को सौंप दी जानी चाहिए।

केन्द्रीय सरकार प्रतिवर्ष न्यूनतम पांच करोड़ रुपए उपलब्ध कराए

d j ksM
mi y Cèk
d jk

(5) संविधान में इस बात की व्यवस्था होनी चाहिए कि केन्द्रीय सरकार प्रतिवर्ष अधिवास आयोग को न्यूनतम पांच करोड़ रुपए की राशि उपलब्ध कराएगी ताकि वह इस संबंध में अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सके।

श्रीमान अध्यक्ष महोदय ये संकल्प वास्तव में हमारे आंदोलन का मुख्य सहारा है। इनमें शब्दचयन इतने स्पष्ट रूप से किया गया है कि आपसे इनकी सिफारिश करने के लिए मुझे कोई लंबा चौड़ा भाषण देने की आवश्यकता नहीं है। पहले संकल्प में सरकार द्वारा क्रिप्स प्रस्तावों की घोषणा करने की निंदा की गई है जोकि अनुसूचित जातियों के हितों के लिए हानिकारक हैं। संकल्प II, III और