74. 18/19.7.1942 यदि लोकतंत्र समाप्त होता है, तो यह हमारा विनाश होगा। - Page 275

254 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

IV में वे व्यवस्थाएं दी गई हैं जिन्हें अनुसूचित जातियों के आर्थिक और सामाजिक कल्याण के लिए भावी संविधान मेंं शामिल किया जाना नितांत जरूरी है। हमें हिंदू जाति के लुभावने आश्वासनों पर कोई विश्वास नहीं है। ऐसे लोगों पर भला कौन विश्वास कर सकता है जो पूना समझौते की स्याही सूखने से पहले ही उसके विरुद्ध हो गए थे? यदि भारत के लाखों दलित वर्गों का भाग्य ऐसे समुदायों के हाथों सौंप दिया जाता है जो अनुसूचित जातियों द्वारा अब तक की गई प्रगति को रोकने के इच्छुक हैं, तो वह दुनिया के इतिहास का सबसे काला दिन होगा। ये संकल्प हमारे महाधिकार पत्र हैं और दलित वर्गों के प्रत्येक सदस्य को इनमें निर्धारित किए गए उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए अपने जीवन का त्याग तक करने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। आज भी हमारे लोगों के साथ गांवों में गुलामों जैसा व्यवहार किया जा रहा है और यदि हमारा भाग्य हिंदू जाति के हाथों में सौंप दिया जाता है तो हम इस बात की कल्पना आसानी से कर सकते हैं कि हमारा भाग्य क्या होगा। इसलिए, यह हमारे समुदाय के प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह इन संकल्पों का समर्थन करे। इन शब्दों के साथ ही मैं इन संकल्पों की आपके द्वारा स्वीकृति के लिए जोरदार सिफारिश करता हूं।

राव बहादुर एन. शिवराज ने इलाहाबाद के श्री राय साहब शामलाल से संकल्प का अनुमोदन करने को कहा।

राय साहब शामलाल ने कहा,

श्रीमान अध्यक्ष महोदय, देवियो और सज्जनो,

मुझे नासिक के अपने मित्र श्री बी. के. गायकवाड़ द्वारा प्रस्तुत किए गए संकल्प का अनुमोदन करने में अत्यधिक प्रसन्नता हो रही है। मैं पिछले लगभग तीन दशकों से दलित वर्गों का सामाजिक कार्यकर्ता रहा हूं। अपने चरम लक्ष्यों और उद्देश्यों का कोई अधिकृत कार्यक्रम न होना हमारी सबसे बड़ी कमी रही है। इस कमी को अब अभी प्रस्तुत संकल्पों द्वारा दूर किया जाएगा। जब दिल्ली में क्रिप्स प्रस्तावों का खुलासा हुआ था तो डॉ. अम्बेडकर ने बिना कोई समय व्यर्थ गवाएँ पूरे भारत की अनुसूचित जातियों के दिल्ली स्थित नेताओं को आमंत्रित किया था। वहां बैठक के पश्चात हमने सर्वसम्मति से प्रस्तावों को अस्वीकार करने का निर्णय लिया था, जो कि पूर्णतः एकपक्षीय और दलित वर्गों को अत्यधिक क्षति पहुंचाने के लिए तैयार किए गए थे। मेरी समझ से एक लंबा चौड़ा भाषण देकर आपको यह समझाना कि हमारी कमियां क्या हैं और हम किन कमजोरियों से परेशान हैं, अनावश्यक है। हममें से प्रत्येक रोज उनका सामना करता है और यहां उनका उल्लेख करना अनावश्यक