255 माना जाएगा। यह संकल्प हमारी वर्तमान पीढ़ी और आने वाली पीढि़यों के भले के लिए है इसलिए इसे सर्वसम्मति से स्वीकृति दी जानी चाहिए। मैं इस सम्मेलन को, इस उद्देश्य को पूरा करने में अपने प्रांत के हार्दिक समर्थन का विश्वास दिलाता हूं। इन कुछ शब्दों के साथ मैं इस संकल्प का समर्थन करता हूं और आपकी स्वीकृति के लिए इसकी सिफारिश करता हूं।
इस संकल्प का निम्नलिखित प्रतिनिधियों ने समर्थन कियाः (1) श्री गोपाल सिंह, एम.बी.ई., एम.एल.ए. (पंजाब)
(2) श्री एन. एन. दास, एम.ए., बी.एल. (कलकत्ता)
(3) श्री आर. आर. भोले, बी.ए., एल.एलबी., एम.एलए., (पूना, बंबई) (4) श्री ए. डी. राय, बी.ए., एम.एल.सी., (जेस्सोर, बंगाल)
(5) श्री पी. एम. पटानी, (अहमदाबाद, गुजरात)
(6) श्री मांगीलाल (राजपूताना)
(7) श्री एच. ए. कोसारे, बी.ए. (नागपुर)
(8) श्री बी. एच. वराले, एम.एल.ए. (कर्नाटक, बंबई)
संकल्पों के प्रस्तावित और विधिवत समर्थित होने पर अध्यक्ष ने उन पर मतदान कराया। चूंकि किसी ने भी इन संकल्पों का विरोध नहीं किया, अतः उन्होंने इन संकल्पों को सर्वसम्मति से पारित घोषित किया।
इसके पश्चात अध्यक्ष, राव बहादुर एन. शिवराज ने संकल्प का दूसरा भाग अर्थात संकल्प का खंड V प्रस्तुत करने के लिए श्री डी. जी. जाधव,बी. ए., एल.एलबी, एम.एलए., जलगांव (बंबई) को आमंत्रित किया।
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श्री डी. जी. जाधव ने संकल्प को प्रस्तुत करते हुए कहा,
‘‘श्रीमान अध्यक्ष महोदय, प्रतिनिधि बंधुओं, देवियो और सज्जनो, वह संकल्प, जिसको प्रस्तुत करने का गौरव मुझे प्राप्त हुआ है, निम्नानुसार हैः
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अखिल भारतीय अनुसूचित जाति परिसंघ की स्थापना
इस सम्मेलन का विचार है कि अनुसूचित जातियों के राजनैतिक आंदोलन